कौन हैं बद्री विशाल, जिनकी बद्रीनाथ में होती पूजा,बंद मंदिर में 6 महीने जलती अखंड ज्योति

कौन हैं बद्री विशाल, जिनकी बद्रीनाथ में होती पूजा,बंद मंदिर में 6 महीने जलती अखंड ज्योति

Badrinath Dham Interesting Facts: आज 23 अप्रैल गुरुवार को गंगा सप्तमी के अवसर पर बद्रीनाथ धाम के कपाट विधि विधान से खोल दिए गए. मंत्रोच्चार और भगवान बद्री विशाल जयघोष के बीच मंदिर के कपाट खोले गए. आज 5 शुभ योग सुकर्मा योग, धृति योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग और अमृत सिद्धि योग है. चार धाम यात्रा में बद्रीनाथ धाम एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. यदि आप चार धाम की यात्रा पर आते हैं तो बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए बगैर आपकी यात्रा अधूरी रहती है. चार धाम यात्रा में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम शामिल हैं. बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री विशाल का निवास है. यह मंदिर 6 महीने के लिए खुलता है और 6 महीने बंद रहता है. इसमें रोचक बात यह है कि जब मंदिर बंद रहता है तो 6 महीने तक दीपक जलता रहता है. आइए जानते हैं भगवान बद्री विशाल और उनके धाम से जुड़ी रोचक बातें.

कौन हैं भगवान बद्री विशाल?

बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु स्वयं भगवान बद्री विशाल के रूप में विराजमान हैं. गर्भ गृह में उनके साथ माता लक्ष्मी भी विराजमान रहती हैं. मंदिर के गर्भ गृह में उद्धव जी और धन​पति कुबेर भी रहते हैं. बद्रीनाथ धाम के मंदिर को बदरी नारायण मंदिर भी कहा जाता है.

कैसे पड़ा बद्रीनाथ धाम का नाम?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता लक्ष्मी भगवान विष्णु से रूठ गईं और बैकुंठ से चली गईं तो भगवान विष्णु ने वर्तमान बद्रीनाथ धाम में आकर तपस्या की. जब लक्ष्मी जी शांत हुईं तो वो श्रीहरि को खोजते हुए यहां आईं तो देखा कि भगवान विष्णु बदरी के पेड़ों वाले वन में तपस्या कर रहे थे. बदरी का अर्थ है बेड़ का फल. तब माता लक्ष्मी जी ने भगवान विष्णु को बदरीनाथ कहा. इस तरह से इस स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा. धाम का अर्थ निवास स्थान से है, यानि जिस स्थान पर बद्रीनाथ का निवास हो.

एक अन्य कथा के अनुसार, बद्रीनाथ में भगवान विष्णु साधना में लीन थे, तो उनको सर्दी से बचाने के लिए माता लक्ष्मी ने बेरी के वृक्ष का रूप धारण कर लिया. इससे विष्णु जी प्रसन्न हुए और कहा कि इस स्थान को बद्रीनाथ के नाम से जाना जाएगा और यहां मेरे साथ आपकी भी पूजा होगी.

धरती का बैकुंठ है बद्रीनाथ धाम

बद्रीनाथ धाम को भू बैकुंठ यानि धरती का बैकुंठ कहा जाता है. अलकनंदा नदी के किनारे नर और नारायण पर्वतों के बीच भगवान विष्णु योग मुद्रा में माता लक्ष्मी के साथ विराजमान हैं.

बद्रीनाथ में नर नारायण ने की तपस्या

बद्रीनाथ धाम दो पर्वतों के बीच में स्थित है. इन दो पर्वतों को नर और नारायण कहा जाता है. भगवान विष्णु ने अपने अंशावतार नर और नारायण रूप में यहां पर तपस्या की थी. द्वापर युग में नर रूप में अर्जुन और नारायण के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया था.

बद्रीनाथ धाम में 6 माह जलता है अखंड दीपक

बद्रीनाथ धाम में जब बर्फबारी होती है तो 6 माह के लिए मंदिर के कपाट बंद कर देते हैं और वहां पर एक अखंड दीपक जला दिया जाता है. जब 6 महीने के बाद मंदिर के कपाट खोले जाते हैं, तो वह दीपक जलता हुआ मिलता है. मान्यता है कि इन 6 महीनों में देवता भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उस दीपक को जलाए रखते हैं.

कहावत में बद्रीनाथ धाम की महिमा

बद्रीनाथ धाम को लेकर एक कहावत है कि जो जाए बदरी, वो न आए ओदरी. इस कहावत का अर्थ है कि जो व्यक्ति एक बार बद्रीनाथ धाम चला जाता है, उसे जीवन और मरण से मोक्ष मिल जाता है, उसे फिर से माता के गर्भ में नहीं जाना पड़ता है. इस कहावत में बद्रीनाथ धाम की पूरी महिमा का वर्णन है. भगवान बद्री विशाल की पूजा और दर्शन करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.

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