Chaitra Navratri 2026: यहां गुजरने वाले हर यात्री को माता से लेनी पड़ती है आज्ञा, बेहद प्र

Chaitra Navratri 2026: यहां गुजरने वाले हर यात्री को माता से लेनी पड़ती है आज्ञा, बेहद प्र

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यहां गुजरने वाले यात्री को माता से लेनी पड़ती है आज्ञा, जागृत सिद्धपीठ है यह

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि चल रहे हैं और हर घर में माता रानी की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्रि के मौके पर हम आपको माता के ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां यात्रा करने से पहले माता के दर्शन करना जरूरी माना जाता है. माता काली का अवतार रंकिणी देवी मंदिर एक प्राचीन और जागृत सिद्धपीठ है. आइए जानते हैं झारखंड के रंकिणी देवी मंदिर के बारे में खास बातें…

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Chaitra Navratri की शुरुआत हो चुकी है और इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की हर दिन पूजा अर्चना की जाती है. हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है. इस दौरान देश के सभी देवी मंदिरों में अलग धूम रहती है. हर साल इस त्योहार की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है, जो इस साल 19 मार्च दिन गुरुवार से शुरुआत हो चुकी है और समापन 27 मार्च दिन शुक्रवार को होगा. नवरात्रि के मौके पर हम आपको झारखंड के ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां माता के दर्शन के बिना कोई भी गुजरने वाले यात्री, ड्राइवर, छात्र आदि नहीं जा सकता. आइए जानते हैं माता के इस मंदिर के बारे में…

प्राचीन और जागृत सिद्धपीठ रंकिणी देवी मंदिर
चैत्र नवरात्रि देश के सबसे बड़े पर्वों में से एक है, जिसे 9 दिनों तक मनाया जाता है. इस दौरान देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की विधि अनुसार पूजा-पाठ की जाती है और माता के मंदिरों में अलग ही रौनक और धूम रहती है. हर ओर भक्ति भाव का वातावरण रहता है. देश में देवी के हजारों मंदिर हैं. माता के उन्हीं मंदिरों में से एक झारखंड राज्य के जमशेदपुर जिले के जादूगोड़ा के पास बंसिला ग्राम पंचायत के रोहिणीबेरा गांव में स्थित ‘रंकिणी देवी मंदिर‘ है, जो कि एक प्राचीन और जागृत सिद्धपीठ है. यह मंदिर मुख्य रूप से देवी काली को समर्पित है. इसे कपड़गड़ी घाट रंकिणी देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.

बिना दर्शन नहीं कर सकते आगे की यात्रा
रंकिणी देवी मंदिर में रखी पत्थर की मूर्ति को देवी काली का अवतार माना जाता है. माना जाता है कि देवी रंकिणी एक पत्थर में विराजमान हैं और आज भी जागृत हैं, जिसका आकार और चमक समय के साथ बढ़ता जा रहा है. रंकिणी देवी मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां स्थापित पत्थर की मूर्ति देवी रंकिणी का साक्षात अवतार है. माना जाता है कि पहले घने जंगलों से गुजरने वाले लोग अपनी सुरक्षा और कल्याण के लिए माता रंकिणी देवी की पूजा करते थे. उनसे अपने मंगल के लिए आदर्शवाद लेते थे. आज भी इस ओर से गुजरने वाले यात्री, ड्राइवर और छात्र माता के दर्शन और आशीर्वाद लेकर ही अपनी आगे की यात्रा करते हैं.

नवरात्रि में श्रद्धालुओं की भीड़
कपड़गड़ी घाट के पास स्थित रंकिणी देवी मंदिर की खासियत है कि यह सड़क के ठीक किनारे पर स्थित है, ऐसे में यहां बुजुर्गों को आने में सहूलियत रहती है. वहीं, दिन भर, खासकर नवरात्रि के दौरान, मंदिर के परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रहती है. मंदिर में प्रतिदिन होने वाली सुबह-शाम की आरती काफी आकर्षक होती है, जिसमें भारी संख्या में भक्त शामिल होते हैं. नवरात्रि के समय, रंकिणी देवी मंदिर में नौ दिनों तक देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा-पाठ, श्रृंगार और आरती की जाती है. इस दौरान, दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु देवी मां के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर परिसर में उमड़ते रहते हैं.

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Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



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