Lolark chhath 2025: काशी के इस कुंड में डुबकी लगाने से भर जाती है सूनी गोद! जानिए किस देव की होती पूजा और महत्व
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Lolark Chhath पर काशी के लोलार्क कुंड में स्नान और लोलार्केश्वर महादेव की पूजा से संतान प्राप्ति व शारीरिक कष्टों से मुक्ति की मान्यता है, लाखों दंपति यहां आते हैं.
लोलार्क षष्ठी पर इस कुंड में स्नान करने से भर जाएगी सूनी गोद! (AI)लोलार्क षष्ठी के दिन स्नान की मान्यता

काशी खंड, शिव पुराण, विष्णु पुराण समेत कई सनातनी धर्मग्रंथों में इसका उल्लेख है. मान्यता यह भी है कि मानवों के बीच जीवन शक्ति और पवित्रता का विस्तार करने के लिए महादेव ने सूर्यदेवता को अपने दूत के रूप में काशी भेजा था. स्कंद पुराण में लोलार्क कुण्ड की महिमा बताई गई है, जिसमें लिखा है कि अर्क अर्थात् भगवान् सूर्यका मन काशी के दर्शनके लिए लोल (चंचल) हो उठा था, इसलिए काशी में उनकी लोलार्कं नाम से ख्याति हुई . ऐसी मान्यता है कि सदियों पहले यहां एक बड़ा उल्कापिंड गिरा था, जिससे इस कुंड का निर्माण हुआ.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आपको बता दें कि कहते हैं सूर्य भगवान की पूजा और लोलार्क कुंड में स्नान के बाद एक फल या सब्जी का दान करना चाहिए. इसके बाद उस सब्जी या फल का सेवन नहीं करना चाहिए. जो लोग मनोकामना मांगते हैं, उन्हें मनोकामना पूर्ति तक उसे उसका सेवन नहीं करना चाहिए. लोग यहां अपने कपड़े भी छोड़कर जाते हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


