बुध प्रदोष तिथि का व्रत आज, भगवान शिव की पूजा से होगा लाभ, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और योग
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पूजा करने से सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है.अब सवाल है कि आखिर बुध प्रदोष व्रत का शुभ समय क्या है? बुध प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त? बुध प्रदोष व्रत का क्या है महत्व? क्या है बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि? आइए जानते हैं इस बारे में-
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार 20 अगस्त 2025 को भाद्रपद माह का पहला बुध प्रदोष व्रत रखा जाएगा. त्रयोदशी तिथि दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर 21 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगी.पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 56 मिनट से रात 9 बजकर 7 मिनट तक है. इस दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक रहेगा, जिसमें पूजा नहीं करनी चाहिए.
प्रदोष काल (शाम 06:56 से 09:07) में पूजा और कथा का पाठ करना अति उत्तम माना जाता है. संध्या के समय पूजन करने के बाद बुध प्रदोष व्रत कथा भी सुनें. इसके बाद आरती करें और घर के सभी सदस्यों को प्रसाद देकर भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करें. साथ ही ब्राह्मण और जरूरतमंद को अन्न दान करें.दूसरे दिन पारण करना चाहिए.
बुध प्रदोष व्रत के शुभ योग और नक्षत्र
बुध प्रदोष व्रत के दिन कैसे करें पूजा
बुध प्रदोष व्रत का महत्व
बुध प्रदोष व्रत को शास्त्रों में बुद्धि, विद्या, वाणी और नौकरी व व्यापार में सफलता प्रदान करने वाला व्रत माना गया है. इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की भी विशेष पूजा का विधान है. यह व्रत विद्यार्थियों, व्यापारियों और वाणी से कार्य करने वालों (वकील, वक्ता, लेखक, शिक्षक आदि) के लिए विशेष फलदायी है. बुध प्रदोष तिथि का व्रत करने से व्रती को धन, विद्या और वाणी पर नियंत्रण की प्राप्ति होती है. साथ ही रोग और कष्ट दूर होते हैं, जीवन में शांति और सौहार्द बढ़ता है.


