आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब है? 4 घंटे 36 मिनट का शुभ समय, जानें तारीख, कलश स्थापना मुहूर्त
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब है? जानें तारीख, कलश स्थापना मुहूर्त, महत्व
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Ashadha Gupt Navratri 2026 Date: सालभर में गुप्त नवरात्रि दो बार आती है. एक माघ और दूसरा आषाढ़ में. इस समय आषाढ़ माह चल रही है. आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होगा. इस दिन कलश स्थापना के लिए 4 घंटे 36 मिनट का शुभ मुहूर्त है. गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या की पूजा करते हैं.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 तारीख और कलश स्थापना मुहूर्त.
Ashadha Gupt Navratri 2026 Date: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है. इसमें मां दुर्गा के 9 स्वरूपों के अलावा 10 महाविद्याओं की पूजा करते हैं. साल में दो बार गुप्त नवरात्रि आती है, एक आषाढ़ और दूसरा माघ में. इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के लिए 4 घंटे 36 मिनट का शुभ मुहूर्त है. इसके अलावा दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना कर सकते हैं.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 का शुभारंभ
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई को दोपहर में 3 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन 15 जुलाई को दिन में 11 बजकर 50 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई दिन बुधवार से होगा.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कलश स्थापना मुहूर्त
15 जुलाई को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह में 5 बजकर 33 मिनट से सुबह 10 बजकर 09 मिनट तक है. वहीं दोपहर में कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है. बुधवार को अभिजीत मुहूर्त न होने से दोपहर में कलश स्थापना नहीं होगी.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 मुहूर्त
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:12 ए एम से लेकर 04:52 ए एम तक है. सुबह में लाभ-उन्नति मुहूर्त 05 बजकर 33 मिनट से 07 बजकर 17 मिनट तक है. वहीं अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 07 बजकर 17 मिनट से सुबह 09 बजे तक है. उस दिन शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 10 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक है. प्रतिपदा के दिन निशिता मुहूर्त 12:07 ए एम से लेकर 12:48 ए एम तक है.
हर्षण योग और पुष्य योग में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि
इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हर्षण योग और पुष्य योग में होगी. प्रतिपदा को हर्षण योग प्रात:काल से लेकर सुबह 08:04 ए एम तक है, उसके बाद से वज्र योग बनेगा, जो 16 जुलाई को 04:30 ए एम तक रहेगा. फिर सिद्धि योग होगा. नवरात्रि के पहले दिन पुष्य योग प्रात:काल से लेकर रात 09 बजकर 46 मिनट तक होगा.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या की पूजा
गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या की पूजा करते हैं, उनमें महाकाली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं.
- महाकाली की पूजा से भय, बुरी नजर और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है.
- तारा देवी की आराधना से मोक्ष, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति होती है.
- त्रिपुर सुंदरी की पूजा से आकर्षण और भौतिक सुख प्राप्त होता है.
- भुवनेश्वरी की कृपा से ब्रह्मांडीय ऊर्जा और ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी.
- छिन्नमस्ता के आशीर्वाद से साहस बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
- त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से तेज, उग्र शक्ति और सभी बाधाओं का निवारण हो जाता है.
- देवी धूमावती की कृपा से दुर्भाग्य, दरिद्रता और दुखों का अंत होता है.
- बगलामुखी की पूजा करने से मुकदमों में विजय और वाक् सिद्धि होती है.
- मातंगी कृपा से संगीत, कला और ज्ञान की प्राप्ति होगी.
- कमला देवी धन, समृद्धि और वैभव प्रदान करती हैं.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें


