Budh Pradosh Vrat Katha: बुध प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने व सुनने से हर कष्ट होगा दूर, भगवान शिव की बरसेगी कृपा

Budh Pradosh Vrat Katha: बुध प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने व सुनने से हर कष्ट होगा दूर, भगवान शिव की बरसेगी कृपा

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Budh Pradosh Vrat Katha: बुध प्रदोष व्रत करने से जन्मकुंडली में अशुभ बुध या कमजोर बुध के दोष शांति पाते हैं. यह व्रत विद्यार्थियों, नौकरी पेशा, व्यापारियों और वाणी से कार्य करने वालों (वकील, वक्ता, लेखक, शिक्षक…और पढ़ें

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बुध प्रदोष व्रत की संपूर्ण कथा, पढ़ने व सुनने से हर कष्ट होगा दूर, यहां पढ़ें
Budh Pradosh Vrat Katha In Hindi : प्रदोष व्रत प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है, जो शिवजी को अर्पित है. जब यह व्रत बुधवार को पड़ता है, तो इसे बुध प्रदोष कहा जाता है. शास्त्रों में बुध प्रदोष को बुद्धि, विद्या, वाणी और व्यापार में सफलता प्रदान करने वाला व्रत माना गया है. इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की भी विशेष पूजा का विधान है. पूजा करने के बाद बुध प्रदोष व्रत की कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए. मान्यता है कि बुध प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करने से सभी कष्ट व परेशानियों से मुक्ति मिलती है और ग्रह-नक्षत्रों का शुभ फल भी प्राप्त होता है.

बुध प्रदोष व्रत कथा (Budh Pradosh Vrat Katha)
प्राचीन काल की बात है, एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ. विवाह के दो ही दिन हुए थे और उसकी पत्‍नी मायके चली गई. कुछ दिनों के बाद वह पुरुष पत्‍नी को लेने उसके यहां गया. बुधवार को जब वह पत्‍नी के साथ लौटने लगा तो ससुराल पक्ष ने उसे रोकने का प्रयत्‍न किया कि विदाई के लिए बुधवार का दिन शुभ नहीं होता है. लेकिन दामाद माना नहीं और पत्‍नी के साथ बैल गाड़ी में चल पड़ा. विवश होकर सास ससुर ने अपने जमाई और पुत्री को भारी मन से विदा किया.

नगर के बाहर पहुंचने पर पत्‍नी को प्यास लगी. पुरुष लोटा लेकर पानी की तलाश में चल पड़ा. पत्‍नी एक पेड़ के नीचे बैठ गई. थोड़ी देर बाद पुरुष पानी लेकर वापस लौटा, तब उसने देखा कि उसकी पत्‍नी किसी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही है और उसके लोटे से पानी पी रही है. उसको क्रोध आ गया. वह निकट पहुंचा तो उसके आश्‍चर्य का कोई ठिकाना न रहा, क्योंकि उस आदमी की सूरत उसी की भांति थी. पत्‍नी भी सोच में पड़ गई. दोनों पुरुष झगड़ने लगे.

धीरे धीरे वहां कॉफी भीड़ एकत्रित हो गई और सिपाही भी आ गए. हमशक्ल आदमियों को देख वे भी आश्‍चर्य में पड़ गए. उन्होंने स्त्री से पूछा- उसका पति कौन है? वह आश्चर्यचकित अवस्था से देखती रही. तब वह पुरुष भगवान शिव से प्रार्थना करने लगा- हे भगवान! हमारी रक्षा करें. मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैंने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार को पत्‍नी को विदा करा लिया. मैं भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं करूंगा.

जैसे ही उसकी प्रार्थना पूरी हुई, दूसरा पुरुष अंतर्ध्यान हो गया. पति-पत्‍नी सकुशल अपने घर पहुंच गए. उस दिन के बाद से पति-पत्‍नी नियमपूर्वक बुध त्रयोदशी प्रदोष का व्रत रखने लगे. इसलिए बुध त्रयोदशी व्रत हर मनुष्य को करना चाहिए.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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