कहीं आपके घर में तो नहीं है वास्तुदोष? जानिए किस दिशा में होना चाहिए किचन, टॉयलेट और बेडरूम

कहीं आपके घर में तो नहीं है वास्तुदोष? जानिए किस दिशा में होना चाहिए किचन, टॉयलेट और बेडरूम

ऋषिकेश: भारतीय संस्कृति में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है. वास्तु केवल इमारत बनाने का विज्ञान ही नहीं बल्कि ऊर्जा, संतुलन और खुशहाली का आधार भी है. कहा जाता है कि घर की सही दिशा और सही प्लानिंग से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. वहीं अगर घर गलत दिशा में या गलत तरीके से बनाया जाए तो वास्तु दोष उत्पन्न होता है, जिससे स्वास्थ्य, संबंध और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसलिए घर बनाते समय वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है.

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान पुजारी शुभम तिवारी ने बताया कि वास्तु शास्त्र केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान है. यह ऊर्जा और दिशा का वह संयोजन है, जो हमारे जीवन को प्रभावित करता है. घर में मेन गेट से लेकर बेडरूम, किचन, बाथरूम और पूजा घर तक हर स्थान का एक निश्चित महत्व है. अगर इन्हें सही दिशा में बनाया जाए तो घर में न केवल सुख-शांति और समृद्धि आती है बल्कि नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है. इसलिए घर बनाते समय वास्तु के इन नियमों का ध्यान रखना चाहिए. यह हमें न केवल एक सुंदर मकान देता है बल्कि स्वस्थ और खुशहाल जीवन का आधार भी बनाता है.

मेन गेट – वास्तु के अनुसार घर का मेन गेट सबसे अहम स्थान होता है क्योंकि यहीं से ऊर्जा का प्रवेश होता है. इसे हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में रखना शुभ माना गया है. पूर्व दिशा से सूर्य की पहली किरणें आती हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है. उत्तर दिशा धन और समृद्धि की दिशा है इसलिए मुख्य द्वार का वहां होना भी लाभकारी है. दक्षिण और पश्चिम दिशा में मेन गेट बनाना अशुभ माना जाता है.

घर का ढलान – वास्तु शास्त्र में घर के प्लॉट या मकान का ढलान भी महत्व रखता है. आदर्श घर का ढलान हमेशा पूर्व, उत्तर या ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व की ओर होना चाहिए. इससे घर में धन, स्वास्थ्य और खुशहाली बनी रहती है.

लिविंग रूम और हॉल – घर का लिविंग रूम या हॉल हमेशा उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में होना चाहिए. यह मेहमानों के स्वागत और घर की ऊर्जा का मुख्य स्थान होता है. इस दिशा में हॉल बनाने से घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है और रिश्तों में सामंजस्य आता है.

रसोईघर – रसोईघर को आग और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. वास्तु के अनुसार किचन का सबसे शुभ स्थान दक्षिण-पूर्व दिशा है. इसे अग्नि कोण कहा जाता है. अगर यह संभव न हो तो उत्तर-पश्चिम दिशा में भी किचन बनाया जा सकता है. लेकिन ध्यान रहे कि रसोईघर और टॉयलेट कभी भी साथ-साथ न हों क्योंकि इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

बाथरूम और टॉयलेट – बाथरूम और टॉयलेट को हमेशा पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए. इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं नहीं होतीं. ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में टॉयलेट बनाना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है.

बेडरूम – परिवार के मुखिया का बेडरूम हमेशा दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए. यह स्थिरता और मजबूती का प्रतीक है. बच्चों का बेडरूम पूर्व या उत्तर दिशा में होना अच्छा माना जाता है. वहीं नवविवाहित दंपति का कमरा दक्षिण दिशा में होना शुभ रहता है.

खिड़कियां और दरवाजे – घर की खिड़कियां और दरवाजे उत्तर दिशा में ज्यादा से ज्यादा रखने चाहिए. उत्तर दिशा से घर में ताजी हवा और प्रकाश आता है जो ऊर्जा और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है. पूर्व दिशा में भी खिड़कियां रखना शुभ है.

पूजा घर – घर का पूजा घर ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए. यह स्थान आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का स्रोत है. यहां पूजा करने से मन को शांति और घर में सुख-समृद्धि मिलती है.

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