कहीं आपके घर में तो नहीं है वास्तुदोष? जानिए किस दिशा में होना चाहिए किचन, टॉयलेट और बेडरूम
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान पुजारी शुभम तिवारी ने बताया कि वास्तु शास्त्र केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान है. यह ऊर्जा और दिशा का वह संयोजन है, जो हमारे जीवन को प्रभावित करता है. घर में मेन गेट से लेकर बेडरूम, किचन, बाथरूम और पूजा घर तक हर स्थान का एक निश्चित महत्व है. अगर इन्हें सही दिशा में बनाया जाए तो घर में न केवल सुख-शांति और समृद्धि आती है बल्कि नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है. इसलिए घर बनाते समय वास्तु के इन नियमों का ध्यान रखना चाहिए. यह हमें न केवल एक सुंदर मकान देता है बल्कि स्वस्थ और खुशहाल जीवन का आधार भी बनाता है.
घर का ढलान – वास्तु शास्त्र में घर के प्लॉट या मकान का ढलान भी महत्व रखता है. आदर्श घर का ढलान हमेशा पूर्व, उत्तर या ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व की ओर होना चाहिए. इससे घर में धन, स्वास्थ्य और खुशहाली बनी रहती है.
रसोईघर – रसोईघर को आग और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. वास्तु के अनुसार किचन का सबसे शुभ स्थान दक्षिण-पूर्व दिशा है. इसे अग्नि कोण कहा जाता है. अगर यह संभव न हो तो उत्तर-पश्चिम दिशा में भी किचन बनाया जा सकता है. लेकिन ध्यान रहे कि रसोईघर और टॉयलेट कभी भी साथ-साथ न हों क्योंकि इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
बेडरूम – परिवार के मुखिया का बेडरूम हमेशा दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए. यह स्थिरता और मजबूती का प्रतीक है. बच्चों का बेडरूम पूर्व या उत्तर दिशा में होना अच्छा माना जाता है. वहीं नवविवाहित दंपति का कमरा दक्षिण दिशा में होना शुभ रहता है.
पूजा घर – घर का पूजा घर ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए. यह स्थान आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का स्रोत है. यहां पूजा करने से मन को शांति और घर में सुख-समृद्धि मिलती है.


