आरती करते वक्त आंखें खुली रखें या बंद? जानें शास्त्रों के अनुसार कौन-सा तरीका देता है सच्चा आध्यात्मिक अनुभव
आरती के समय आंखें बंद क्यों न करें
आरती को भगवान का साक्षात स्वागत माना जाता है. मान्यता है कि जब हम आरती करते हैं, तो देवता वहां उपस्थित होते हैं. ऐसे में आंखें बंद करना ऐसा है जैसे हम उनसे मिलने का मौका गंवा दें. आरती करते समय आंखें खुली रखकर भगवान की मूर्ति, तस्वीर या ज्योति को एकटक निहारने से भक्ति भाव गहरा होता है और मन पूरी तरह भगवान पर केंद्रित रहता है.
1. खड़े होकर आरती करें – खड़े होकर आरती करना सम्मान और आदर का प्रतीक है. यह दर्शाता है कि हम पूरे मन से भगवान का स्वागत कर रहे हैं.
2. आरती की थाली में आवश्यक सामग्री रखें – दीपक के साथ फूल, कपूर और अक्षत रखना शुभ होता है. दीपक में पर्याप्त घी या तेल डालें ताकि वह बीच में न बुझे.
3. आरती घुमाने का सही तरीका – पहले भगवान के चरणों की ओर चार बार, नाभि की ओर दो बार और मुख की ओर एक बार दीपक घुमाएं. इसके बाद पूरे विग्रह के सामने आरती करें.
4. शंख बजाना और जल छिड़कना – आरती के बाद शंख बजाना बहुत शुभ माना जाता है. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. फिर शंख में जल भरकर चारों दिशाओं में छिड़कें, जिससे घर में शांति और समृद्धि बनी रहती है.
आंखें खुली रखने का आध्यात्मिक महत्व
जब हम आरती में भगवान को देखते हैं, तो यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं रहती, बल्कि आत्मा और ईश्वर का मिलन बन जाती है. दीपक की लौ को देखना हमें यह याद दिलाता है कि अंधकार चाहे कितना भी हो, एक छोटी सी ज्योति उसे मिटा सकती है. इसी तरह, भगवान की ओर ध्यान केंद्रित करना जीवन के संकटों को हल्का कर देता है.


