15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि प्रांरभ, जानें नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का महत्व और
15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि प्रांरभ, जानें अखंड ज्योति जलाने के नियम
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Akhand Diya Rules: 15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि शुरू हो रही है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के गुप्त स्वरूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व है. यह ज्योति घर में सुख-शांति और समृद्धि लाती है. इस रिपोर्ट में हम आपको अखंड ज्योति जलाने के महत्व और इससे जुड़े नियमों के बारे में विस्तार से बताएंगे, ताकि आप इन गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें.
Akhand Diya Rules: आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई से होने जा रहा है. गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व तंत्र-मंत्र साधना, शक्ति उपासना और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए माना जाता है. गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की साधना की जाती है. इस दौरान भक्त नौ दिन तक व्रत रखते हैं और विधि-विधान से देवी की पूजा कर मनोकामनाओं की पूर्ति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं. कई श्रद्धालु इन नौ दिनों तक मां दुर्गा के समक्ष अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करते हैं, जिसे अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है. मान्यता है कि नवरात्रि में अखंड दीपक जलाने से माता का आशीर्वाद मिलता है और सभी परेशानियां दूर होती हैं.
अखंड दीपक जलाने का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अखंड ज्योति देवी शक्ति की निरंतर उपस्थिति, ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है. कहा जाता है कि नवरात्रि के दौरान लगातार जलने वाला दीपक घर के वातावरण को पवित्र बनाए रखता है तथा नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम करता है. मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक अखंड ज्योति जलाने से माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य तथा समृद्धि बनी रहती है.
कब से कब तक गुप्त नवरात्रि?
साल 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई दिन बुधवार से हो रही है और 22 जुलाई दिन बुधवार को समापन होगा. इस बार गुप्त नवरात्रि में तीसरे और चौथे दिन की पूजा 17 जुलाई दिन शुक्रवार को ही की जाएगी. गुप्त नवरात्रि मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है. इन महाविद्याओं में मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला शामिल हैं.
अखंड ज्योति जलाने के प्रमुख नियम
नवरात्रि में अखंड ज्योति स्थापित करने से पहले पूजा स्थान की अच्छी तरह साफ-सफाई करें. दीपक को पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर स्थापित करना शुभ माना जाता है. ज्योति के लिए शुद्ध देसी घी या तिल के तेल का उपयोग किया जा सकता है. अगर घी का दीपक जलाएं तो उसमें रुई की साफ और पर्याप्त लंबी बाती रखें, ताकि दीपक लगातार जलता रहे.
अखंड ज्योति एक बार प्रज्ज्वलित होने के बाद नौ दिनों तक बुझनी नहीं चाहिए. इसलिए समय-समय पर घी या तेल डालते रहें और बाती का भी ध्यान रखें. दीपक को ऐसी सुरक्षित जगह रखें, जहां हवा का तेज प्रवाह ना हो और किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना ना रहे. अगर किसी कारणवश दीपक बुझ जाए तो घबराने के बजाय स्नान कर श्रद्धापूर्वक माता से क्षमा याचना करें और विधि-विधान से पुनः दीप प्रज्ज्वलित करें.
पूजा के दौरान प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र या मां दुर्गा के मंत्रों का पाठ करना शुभ माना जाता है. साथ ही सात्विक भोजन, संयमित आचरण, सत्य वचन और स्वच्छता का विशेष पालन करने की सलाह दी जाती है.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


