सीता नवमी कब है? जानें सही तारीख, महत्व, 2 घंटे 37 मिनट का है पूजा मुहूर्त

सीता नवमी कब है? जानें सही तारीख, महत्व, 2 घंटे 37 मिनट का है पूजा मुहूर्त

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सीता नवमी कब है? जानें सही तारीख, महत्व, 2 घंटे 37 मिनट का है पूजा मुहूर्त

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Sita Navami 2026 Date: सीता नवमी वैशाख शुक्ल नवमी तिथि का मनाते हैं क्योंकि इस दिन सीता जी धरती से प्रकट हुई थीं. इस साल सीता नवमी पर पूजा के लिए ढाई घंटे से अधिक का शुभ मुहूर्त है. आइए जानते हैं सीता नवमी कब है? सीता नवमी का मुहूर्त क्या है?

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सीता नवमी 2026 तारीख और मुहूर्त. (Photo: AI)

Sita Navami 2026 Date: सीता नवमी को सीता जयंती के रूप में भी मनाते हैं. वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता जी का जन्म हुआ था, इस वजह से इस तिथि को हर साल सीता नवमी मनाते हैं. इस दिन व्रत रखकर सीता जन्मोत्सव मनाते हैं. इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत और पूजा करती हैं. सीता नवमी की पूजा के लिए ढाई घंटे से अधिक का मुहूर्त प्राप्त है. आइए जानते हैं कि इस साल सीता नवमी कब है? सीता नवमी का मुहूर्त क्या है?

सीता नवमी 2026 सही तारीख

पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल नवमी तिथि 24 अप्रैल को शाम 7 बजकर 21 मिनट से शुरू होगी और यह 25 अप्रैल को शाम 6 बजकर 27 मिनट पर खत्म होगी. व्रत आदि के लिए उदयातिथि की मान्यता है, लेकिन जयंती या जन्मोत्सव में समय देखा जाता है. सीता जी का जन्म समय दोपहर का है, इस आधार पर सीता नवमी 25 अप्रैल शनिवार को है.

सीता नवमी 2026 मुहूर्त

25 अप्रैल को सीता नवमी का मुहूर्त दिन में 11 बजकर 1 मिनट से प्रारंभ हो रहा है और यह दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक है. सीता नवमी का मध्याह्न का क्षण दोपहर 12:19 पी एम पर है. इस समय सीता जी का जन्म होगा और उत्सव मनाया जाएगा.

सीता नवमी पर ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल 04:19 बजे से लेकर 05:02 ए एम तक है. इस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:53 ए एम से दोपहर 12:46 पी एम तक है.

गंड योग और अश्लेषा नक्षत्र में सीता नवमी

इस साल की सीता नवमी पर गंड योग बना है और अश्लेषा नक्षत्र है. उस दिन गंड योग प्रात:काल से लेकर रात 11 बजकर 43 तक रहेगा. उसके बाद से वृद्धि योग बनेगा. वहीं सीता नवमी पर अश्लेषा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 8 बजकर 4 मिनट तक है, फिर मघा नक्षत्र है.

सीता नवमी का महत्व

वैशाख शुक्ल नवमी को सीता जी धरती से प्रकट हुई थीं. उस समय जनक जी हल से खेत जोत रहे थे, तभी हल का फाल एक कलश से टकराया, उसे निकाला गया तो उसमें से सीता जी प्रकट हुई, जिनका पालन पोषण राजा जनक ने किया. सीता नवमी को सादगी, पवित्रता, त्याग, धैर्य और नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है. इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए माता सीता और प्रभु राम की पूजा करती हैं. सीता जी माता लक्ष्मी की अवतार थीं, इसलिए सीता नवमी पर धन, सुख, समृद्धि की प्राप्ति के उपाय किए जाते हैं.

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कार्तिकेय तिवारीDeputy News Editor

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें

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