सावन का पहला सोमवार 2 अगस्त को, पीरियड्स में रखें या नहीं सोलह सोमवार और सावन सोमवार व्रत?
सावन का पहला सोमवार 2 अगस्त को, पीरियड्स में रखें या नहीं सावन सोमवार व्रत?
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Sawan Somwar Vrat Rules During Periods: सावन का पहला सोमवार 2 अगस्त को है, और इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. कई महिलाएं सावन सोमवार और सोलह सोमवार का व्रत रखती हैं. ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है कि क्या पीरियड्स के दौरान ये व्रत रखे जा सकते हैं या नहीं? धर्मशास्त्र इस विषय पर क्या कहता है, आइए जानते हैं. यह जानकारी उन सभी श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है जो इन व्रतों का पालन करते हैं.
Sawan Somwar Vrat Rules During Periods: सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है और 2 अगस्त को सावन का पहला सोमवार व्रत रखा जाएगा. इस बार सावन में चार सोमवार का व्रत किया जाएगा. भगवान शिव को समर्पित सावन सोमवार और सोलह सोमवार व्रत को लेकर हर साल महिलाओं के मन में एक सामान्य प्रश्न रहता है कि अगर व्रत के दिन मासिक धर्म (पीरियड्स) हो जाएं, तो क्या व्रत रखा जा सकता है या नहीं? क्योंकि महिलाओं को हमेशा यही कहा गया है कि पीरियड्स के दौरान पूजा-पाठ की चीजों से दूर रहना चाहिए. इस विषय पर धर्माचार्यों और पारंपरिक मान्यताओं में अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं, आइए जानते हैं…
प्रत्यक्ष पूजन से परहेज करें – धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीरियड्स के दौरान महिलाओं को मंदिर में प्रवेश, शिवलिंग का स्पर्श और प्रत्यक्ष पूजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है. हालांकि, अधिकांश विद्वानों का मत है कि अगर किसी महिला ने पहले से सावन सोमवार या सोलह सोमवार व्रत का संकल्प लिया है, तो वह व्रत का पालन जारी रख सकती हैं. ऐसे में भगवान शिव का मानसिक रूप से स्मरण, मंत्र जाप और ध्यान करना भी पूजा का ही एक रूप माना जाता है. शास्त्रों में भी शारीरिक पूजा से ज्यादा मानसिक पूजा का ज्यादा महत्व बताया गया है.
पीरियड्स एक प्राकृतिक नियम – महिलाओं का पीरियड्स होना एक प्राकृतिक नियम है और इसमें महिलाओं के जितने भी कार्य निषेध बताए गए हैं, वे इसलिए नहीं कि इस दौरान महिलाएं अपवित्र होती हैं बल्कि इसलिए कि उनको इस समय सेहत पर ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. सावन सोमवार और सोलह सोमवार व्रत एक संकल्प के माध्यम से किए जाते हैं इसलिए इनको तोड़ना जरूरी नहीं है, बस अपनी सेहत का ध्यान रखें.
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इस तरह करें पीरियड्स में पूजा – धर्माचार्यों के अनुसार, अगर पीरियड्स के कारण मंदिर जाना या शिवलिंग पर जलाभिषेक करना संभव ना हो, तो घर पर बैठकर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप, शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ किया जा सकता है. कई लोग पूजा की सामग्री किसी अन्य सदस्य के माध्यम से अर्पित कराते हैं, जबकि स्वयं केवल व्रत और मानसिक उपासना करते हैं. ध्यान रहे कि शास्त्रों में ऐसा कहीं भी वर्णित नहीं है कि मासिक धर्म के दौरान महिला व्रत नहीं कर सकती. भगवान हमेशा शरीर की शुद्धि से ज्यादा मन की शुद्धता पर ध्यान देते हैं.
व्रत को बीच में छोड़ना सही नहीं – सोलह सोमवार व्रत के संबंध में भी यही मान्यता प्रचलित है कि संकल्पित व्रत को बीच में छोड़ना उचित नहीं माना जाता. अगर स्वास्थ्य ठीक हो, तो व्रत रखा जा सकता है. वहीं अगर अत्यधिक शारीरिक असुविधा या चिकित्सकीय कारण हों, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहिए. ऐसी स्थिति में श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का स्मरण करना भी पर्याप्त माना जाता है. धार्मिक विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि पीरियड्स को लेकर अलग-अलग परंपराओं और परिवारों के अपने-अपने नियम हो सकते हैं. इसलिए श्रद्धालुओं को अपने परिवार की परंपरा और अपने गुरु या स्थानीय धर्माचार्य के मार्गदर्शन का भी सम्मान करना चाहिए.
बस इन बातों को रखें ध्यान – धार्मिक मान्यताओं में पीरियड्स के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है. अगर सोलह सोमवार या सोमवार व्रत के दौरान पीरियड्स आ जाते हैं तो आप मानसिक पूजा पर विशेष ध्यान दें. पूजा-पाठ की चीजें और मूर्ति या तस्वीर को स्पर्श ना करें. आप थोड़ी दूर पर बैठकर मन ही मन पूजा कर सकते हैं और प्रार्थना कर सकते हैं.


