लोहा का छल्ला पहनने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, शनिदेव की पड़ सकती है अशुभ दृष्टि

लोहा का छल्ला पहनने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, शनिदेव की पड़ सकती है अशुभ दृष्टि

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Iron Ring Rules: लोहे का छल्ला धारण करने से पहले कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है. मान्यता है कि लोहा का छल्ला पहनने से शनि की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और सकारात्मक फल मिलने लगते हैं. विशेष रूप से जिन जातकों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो, उन्हें यह उपाय लाभकारी माना गया है. आइए जानते हैं लोहे का छल्ला पहनने के नियम…

Lohe Ka Challa Pehnne Ke Niyam: ज्योतिष शास्त्र में लोहे का छल्ले पहनने के कई फायदे बताए हैं और यह छल्ला न्याय व कर्म के कारक ग्रह शनिदेव से जुड़ा माना गया है. शनि ग्रह व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देता है और जीवन में अनुशासन, धैर्य व न्याय का पाठ पढ़ाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या और अशुभ प्रभाव से बचने के लिए लोहे का छल्ला पहनना एक सरल और प्रभावी उपाय माना गया है. हालांकि, इसके लाभ तभी प्राप्त होते हैं जब इसे विधि-विधान और नियमों के अनुसार धारण किया जाए. लोहे का छल्ला किसे पहनना चाहिए, कब पहनना चाहिए, क्यों पहनना चाहिए आदि जानकारी होने के बाद ही इसे धारण करना चाहिए. आइए जानते हैं शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए लोहे का छल्ला पहनने के नियम…

लोहे का छल्ला किस उंगली में पहनें – शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए लोहे का छल्ला दाएं हाथ यानी राइट हैंड साइड की मध्यमा उंगली में धारण करना चाहिए. मध्यमा उंगली का संबंध शनिदेव से माना जाता है. अगर इस हाथ में संभव नहीं है तो बाएं हाथ यानी लेफ्ट हैड साइड के हाथ की मध्यमा उंगली में भी पहनी जा सकती है.

लोहे का छल्ला किस दिन पहनें – लोहे का छल्ला हमेशा अमावस्या तिथि को पहनना चाहिए. अमावस्या के अलावा आप शनिवार के दिन भी पहनन सकते हैं. ये दोनों दिन शनिदेव को समर्पित हैं. इन दोनों दिनों में से किसी भी दिन जब आप छल्ला पहनें तो उस दिन का शुभ मुहूर्त अवश्य जान लें. लोहे के छल्ले की अंगूठी पहनने के लिए सबसे अच्छा समय प्रदोष काल होता है.

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लोहे का छल्ला पहनने की विधि – लोहा का छल्ला पहनने के लिए प्रदोष काल में सबसे पहले उसे सरसों के तेल में डालकर शनि मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः का 108 बार जप करना चाहिए. इसके बाद छल्ले को गंगाजल से साफ करना चाहिए. फिर अंगूठी को शनिदेव के पास रख दें. इसके बाद शनि चालीसा का पाठ करें और शनिदेव की आरती करें. आरती करने के बाद शनिदेव से प्रार्थना करते हुए लोहे का छल्ला पहनें. लोहे का छल्ला पहनने के साथ-साथ सत्य, ईमानदारी और कर्मठता का पालन आवश्यक है. शनिदेव को अनुशासन प्रिय है, इसलिए गलत कर्म करने से उपाय निष्फल हो सकता है.

लोहे का छल्ला किसे पहनना चाहिए? – लोहे का छल्ला शनि दोष से पीड़ित व्यक्ति यानी शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या पहनने वाले व्यक्ति को धारण करना चाहिए. शनि की अशुभ दशा होने पर भी छल्ला लाभकारी परिणाम देता है. धार्मिक जानकारों के अनुसार, बिना कुंडली देखे यह उपाय करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित माना जाता है, क्योंकि कुछ विशेष परिस्थितियों में शनि उपाय उल्टा प्रभाव भी डाल सकता है.

लोहे का छल्ला पहनने के फायदे – ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लोहे का छल्ला पहनने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों में कमी आती है. जीवन में आ रही बाधाएं और विलंब दूर होने लगते हैं. नौकरी व कारोबार में स्थिरता और सफलता प्राप्त होती है और शनिदेव की कृपा से मानसिक तनाव, भय और नकारात्मकता से राहत मिलती है. जीवन में चल रहीं आर्थिक परेशानियों में धीरे-धीरे सुधार होता है और व्यक्ति में धैर्य, संयम और आत्मविश्वास बढ़ता है. धार्मिक विद्वानों का कहना है कि यह उपाय कर्म सुधारने की प्रेरणा भी देता है, जिससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं.

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लोहा का छल्ला पहनने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, शनिदेव हो सकते हैं नाराज

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