राहु-केतु और शनि से परेशान हैं? तो घर में लगाएं ये शुभ पौधे
सनातन परंपरा और ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव माना गया है. मान्यता है कि जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि, राहु, केतु या कालसर्प दोष जैसे अशुभ योग बनते हैं, तो उसे जीवन में अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. दरअसल, कार्यों में बाधाएं, मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयां और पारिवारिक अशांति इन दोषों के सामान्य प्रभाव माने जाते हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन ग्रह दोषों के प्रभाव को कम करने के लिए पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान के साथ-साथ कुछ विशेष पौधों का रोपण भी अत्यंत लाभकारी माना गया है.
पौधों को सही दिशा में लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
वहीं, इस बारे में जब लोकल 18 की टीम ने अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि वास्तु शास्त्र के अनुसार पौधों को सही दिशा में लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है. उन्होंने कहा कि शमी का पौधा शनि और राहु के दोष को शांत करने के लिए विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है. इसलिए इसे मुख्य द्वार के बाहर, छत, बालकनी या बगीचे में लगाया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि शनिवार के दिन इसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि देव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है.
तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र
उन्होंने कहा कि इसी तरह तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है. इसे उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने से घर का वातावरण शुद्ध होता है और राहु-केतु के दोषों में कमी आती है. उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के पौधे में चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा स्थापित कर नियमित पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है. इसके साथ ही शाम के समय घी का दीपक जलाना भी शुभ माना गया है.
सर्पगंधा का पौधा कालसर्प दोष से दिलाता है राहत
उन्होंने बताया कि सर्पगंधा का पौधा कालसर्प दोष से राहत दिलाने वाला माना जाता है. इसलिए इसे मुख्य द्वार, पूर्व, उत्तर या दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाने की सलाह दी जाती है. वहीं, नीम का पेड़ राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को कम करने के साथ-साथ वातावरण को शुद्ध रखने में भी सहायक माना जाता है. उन्होंने कहा कि अपामार्ग का पौधा मानसिक शांति प्रदान करने और राहु दोष को कम करने के लिए वास्तु शास्त्र में उपयोगी बताया गया है.
उन्होंने बताया कि भगवान शिव की आराधना कालसर्प दोष से मुक्ति का सबसे प्रभावी उपाय मानी जाती है. ऐसे में घर के आंगन या ईशान कोण में बेलपत्र अथवा काले धतूरे का पौधा लगाकर नियमित रूप से जल अर्पित करने से शिव और नाग देवता प्रसन्न होते हैं. मान्यता है कि इससे राहु-केतु के दोषों में राहत मिलती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है.
पंडित दीपलाल जयपुरी के अनुसार, इन पौधों की नियमित देखभाल करना और इन्हें हरा-भरा रखना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि सूखे या मुरझाए पौधे नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा दे सकते हैं.


