रसोई में चाकू किस दिशा में रखना चाहिए, वास्तु विशेषज्ञ ने बताए शुभ नियम
अंबाला: घर की रसोई केवल भोजन बनाने की जगह नहीं होती, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे सकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र भी माना गया है. दरअसल, रसोई में मौजूद हर वस्तु का अपना अलग महत्व होता है और इन्हीं में से एक है चाकू भी है. सामान्य तौर पर सब्जियों के काटने के लिए इस्तेमाल होने वाली चाकू को वास्तु शास्त्र में मंगल ग्रह का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि यदि चाकू को सही दिशा और सही तरीके से रखा जाए, तो यह ऊर्जा और साहस का प्रतीक बनती है, लेकिन इसकी गलत जगह या लापरवाही से रख-रखाव घर में नकारात्मक प्रभाव भी पैदा कर सकता है.
वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते है कि सबसे पहले घर की रसोई का जो मुख्य द्वार होता है ठीक उसके ऊपर भगवान शिव को अन्न देती हुई मां अन्नपूर्णा की फोटो लगी होनी चाहिए. इसके साथ ही रसोई का स्थान अग्निकुंड में होना चाहिए और जीरो वाट का लाल बल्ब रसोई में जरूर लगाएं.
चाकू कौन सी दिखा में रखें
उन्होंने कहा किसके साथ ही रसोई में खासतौर पर बुझा हुए चूल्हे के ऊपर तवा नहीं रखना चाहिए और उसे छिपाकर ही रखें. उन्होंने कहा कि वास्तु शास्त्र में मंगल ग्रह की दिशा दक्षिण मानी गई है, इसलिए रसोई में चाकू को दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है. इस दिशा में रखने से व्यक्ति का अपने क्रोध और ऊर्जा पर नियंत्रण बना रहता है तथा चाकू का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों तक सीमित रहता है.
वहीं उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में चाकू रखना शुभ नहीं माना गया है ओर इन दिशाओं का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है और यहां चाकू रखने से घर की सुख-शांति प्रभावित होने के साथ परिवार के सदस्यों की निर्णय क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है.
रसोई में स्टील की चाकू सबसे उपयुक्त
उन्होंने बताया कि वास्तु शास्त्र में चाकू के प्रकार और उसकी बनावट का भी विशेष महत्व बताया गया है. पंडित दीपलाल जयपुरी के अनुसार रसोई में स्टील की चाकू सबसे उपयुक्त मानी जाती है, यदि चाकू का हैंडल लकड़ी का हो तो इसे और भी शुभ माना जाता है. वहीं प्लास्टिक हैंडल वाली चाकू खरीदते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसका रंग काला न हो.काले रंग को नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है, इसलिए इससे बचने की सलाह दी जाती है.
चाकू का रख-रखाव
वहीं पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि चाकू को कभी भी खुले में नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि बार-बार नजर आने वाली चाकू घर के वातावरण में तनाव और आक्रामकता बढ़ाने का कारण बन सकती है. इसलिए इसे किसी दराज या बंद स्थान पर सुरक्षित रखना चाहिए, विशेष रूप से भोजन बनाने के बाद इसे किचन प्लेटफॉर्म पर खुला छोड़ने से बचना चाहिए.
इसके अलावा चाकू के उपयोग के बाद उसकी सफाई भी बेहद जरूरी मानी गई है. उन्होंने कहा कि वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस्तेमाल के तुरंत बाद चाकू को धोकर साफ जगह पर रख देना चाहिए, क्योंकि गंदी चाकू को सिंक या गैस स्टोव के पास छोड़ना शुभ नहीं माना जाता. ऐसी मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं और अनावश्यक खर्च का सामना करना पड़ सकता है.
उन्होंने बताया कि वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि घर की छोटी-छोटी आदतें भी घर के वातावरण पर बड़ा असर डालती हैं. यदि रसोई में चाकू जैसी सामान्य वस्तु का भी सही तरीके से रख-रखाव किया जाए, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है. वहीं इन नियमों की लगातार अनदेखी वास्तु दोष का कारण बन सकती है, हालांकि यह सभी बातें पारंपरिक वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए.


