मंदिर में घंटी क्यों बजाई जाती है? जानें पूजा के समय घंटी बजाने के नियम

मंदिर में घंटी क्यों बजाई जाती है? जानें पूजा के समय घंटी बजाने के नियम

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मंदिर में घंटी क्यों बजाई जाती है? जानें पूजा के समय घंटी बजाने के नियम

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Mandir Ki Ghanti Ka Mahatva: हिंदू मंदिरों में प्रवेश के समय और पूजा में घंटी बजाने का विधान है. कोई 2 से 3 बार घंटी बजाता है तो कोई कई बार बजाता है. आरती के समय तो शुरू से लेकर उसके अंत तक घंटी बजाई जाती है. क्या आप जानते हैं कि मंदिरों में प्रवेश और पूजा के समय घंटी क्यों बजाते हैं? घंटी बजाने के नियम क्या हैं?

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मंदिर में घंटी बजाने का धार्मिक महत्व क्या है?

Mandir Ki Ghanti Ka Mahatva: जब भी हम मंदिर जाते हैं तो उसके मुख्य प्रवेश द्वार पर घंटी या बड़े घंटे दिखाई देते हैं. जो भी भक्त मंदिर में प्रवेश करता है तो वह उस घंटी को बजाता है. घंटी बजाने के साथ लोग देवी या देवता का जयकारा लगाते हैं. हिंदू धर्म में पूजा के समय भी घंटी बजाने का विधान है. एक मंदिर में प्रवेश के समय घंटी बजाते हैं तो दूसरा पूजा के समय. इसका धार्मिक महत्व क्या है? घंटी बजाने के नियम क्या हैं? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब.

मंदिर में घंटी बजाने का धार्मिक महत्व क्या है?

जब कोई मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी बजाता है तो उसका मतलब है कि वह अपने आराध्य के समीप अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है, ताकि देवी और देवता का ध्यान उस पर हो और उसकी प्रार्थना सफल हो.

कहा जाता है कि जब हम घंटी बजाते हैं तो इससे देवी या देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है. घंटी बजाते हैं तो उससे निकलने वाली ध्वनी आस पास की नकारात्मकता को दूर करती है. हमारे अंतर्मन में पैदा हुआ कंपन व्यक्ति के अंदर शुद्धता, भक्ति और पवित्रता का भाव पैदा करता है. इससे हमारे मन का भटकाव दूर होता है. हम एकाग्र होकर पूजा करते हैं.

पूजा के समय घंटी बजाने के नियम क्या हैं?

  • जब आप मंदिर में प्रवेश करते हैं तो उस समय 2 से 3 बार घंटी बजानी चाहिए. बहुत जोर से घंटी नहीं बजानी चाहिए, उससे कर्कश ध्वनि निकलती है.
  • आरती के समय घंटी बजाने की संख्या निर्धारित नहीं है. उस समय घंटी का स्वर मधुर होना चाहिए और आरती के लय के साथ उसका तालमेल होना चाहिए. आरती के प्रारंभ से लेकर अंत तक घंटी बजाते हैं.
  • जब आपकी पूजा संपन्न हो जाए और आप मंदिर से बाहर निकलें तो उस समय घंटी न बजाएं. यह गलत होता है. आगमन के समय घंटी बजाना उपस्थिति दर्ज करना है, विदा होते समय घंटी नहीं बजाते हैं.
  • दोपहर के समय में पूजा और घंटी बजाना वर्जित है. उस समय भगवान के विश्राम का समय होता है. इस वज​ह से आपने देखा होगा कि दोपहर में मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं.
  • कुछ मंदिरों के गर्भगृह में सभी को घंटी बजाने की अनुमति नहीं होती है. उसके लिए कुछ समय निर्धारित होते हैं.

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कार्तिकेय तिवारीDeputy News Editor

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें

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