भौम प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने व सुनने से हर कष्ट होगा दूर, भगवान शिव का मिलेगा आशीर्वाद

भौम प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने व सुनने से हर कष्ट होगा दूर, भगवान शिव का मिलेगा आशीर्वाद

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भौम प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने व सुनने से हर कष्ट होगा दूर, शिवजी का मिलेगा साथ

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Bhaum Pradosh Vrat Katha: पंचांग के अनुसार आज भौम प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बन रहा है. आज भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए. कथा के माध्यम से यह बताया जाता है कि सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा करने से भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. यहां पढ़ें संपूर्ण भौम प्रदोष व्रत कथा…

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Bhaum Pradosh Vrat Katha: आज देशभर में भौम प्रदोष तिथि का व्रत किया जा रहा है. सुबह और प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व है. जब प्रदोष तिथि मंगलवार को पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है. इस दिन व्रत के साथ-साथ कथा सुनने और पढ़ने की परंपरा भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत कथा का श्रवण करने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत कथा में भगवान शिव की महिमा और उनके भक्तों की श्रद्धा का वर्णन मिलता है. यहां पढ़ें भौम प्रदोष व्रत की कथा…

भौम प्रदोष व्रत की कथा | Bhaum Pradosh Vrat Katha In Hindi

एक समय की बात है. एक नगर में एक वृद्धा रहती थी, उसका एक ही पुत्र था. वृद्धा की हनुमानजी पर गहरी आस्था थी. वह प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत रखकर हनुमानजी की आराधना करती थी. एक बार हनुमानजी ने अपनी भक्तिनी उस वृद्ध महिला की श्रद्धा का परीक्षण करने का विचार किया.

हनुमानजी साधु का वेश धारण कर वृद्धा के घर गए और पुकारने लगे- है कोई हनुमान भक्त! जो हमारी इच्छा पूर्ण करे? आवाज उस वृद्धा के कान में पड़ी, पुकार सुन वृद्धा जल्दी से बाहर आई और साधु को प्रणाम कर बोली- आज्ञा महाराज! हनुमान वेशधारी साधु बोले- मैं भूखा हूं, भोजन करूंगा, तुम थोड़ी जमीन लीप दो. वृद्धा दुविधा में पड़ गई. अंतत: हाथ जोड़कर बोली- महाराज! लीपने और मिट्टी खोदने के अतिरिक्त आप कोई दूसरी आज्ञा दें, मैं अवश्य पूर्ण करूंगी.

साधु ने तीन बार प्रतिज्ञा कराने के बाद कहा- तू अपने बेटे को बुला. मैं उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा. यह सुनकर वृद्धा घबरा गई, लेकिन वह प्रतिज्ञाबद्ध थी. उसने अपने पुत्र को बुलाकर साधु को सौंप दिया. वेशधारी साधु हनुमानजी ने वृद्धा के हाथों से ही उसके पुत्र को पेट के बल लिटवाया और उसकी पीठ पर आग जलवाई. आग जलाकर दु:खी मन से वृद्धा अपने घर में चली गई.

इधर भोजन बनाकर साधु ने वृद्धा को बुलाकर कहा- उनका भोजन बन गया है. तुम अपने पुत्र को पुकारो ताकि वह भी आकर भोग लगा ले. इस पर वृद्धा बोली- उसका नाम लेकर मुझे और कष्ट न दें. लेकिन जब साधु महाराज नहीं माने तो वृद्धा ने अपने पुत्र को आवाज लगाई. वह अपनी मां के पास आ गया. अपने पुत्र को जीवित देख वृद्धा को बहुत आश्चर्य हुआ और वह साधु के चरणों में गिर पड़ी. तब हनुमानजी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुए और वृद्धा को भक्ति का आशीर्वाद दिया.
हर हर महादेव !
बजरंगबली की जय !

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Parag SharmaChief Sub Editor

पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें



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