भूलकर भी इन 4 लोगों के बीच में आकर कभी ना बोलें, चाणक्य की यह सलाह हर हानि और परेशानी से र
भूलकर भी इन 4 लोगों के बीच में आकर कभी ना बोलें, चाणक्य की सलाह से होगा लाभ
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Chanakya Niti: चाणक्य नीति का यह विशेष श्लोक बताता है कि किन लोगों से बात नहीं करनी चाहिए. अगर आप इन लोगों के बीच में आकर बोलते हैं तो इनको तो नहीं लेकिन बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है. साथ ही कई तरह की परेशानियों में भी फंस सकते हैं. इसलिए इसका गहरा अर्थ जानें और यह सीखें कि चाणक्य का यह पाठ आज भी आपकी गरिमा और विवेक को बनाए रखने में कैसे सहायक हो सकता है.
Chanakya Niti: भारतीय ज्ञान परंपरा में, नैतिकता और व्यवहार की बात आने पर सबसे पहले आचार्य चाणक्य का नाम लिया जाता है. उनकी नीतियां आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जितनी सदियों पहले थीं. चाणक्य नीति जीवन, संबंधों और सामाजिक व्यवहार के लिए नियम बताती हैं, जो सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. एक नीति में चाणक्य ने बताया है कि कुछ लोगों से कभी बात नहीं करनी चाहिए और ना ही उनके पास से गुजरना चाहिए. अगर आप ऐसे लोगों के पास से होकर गुजरते भी हैं तो आप किसी ना किसी मुसीबत में फंस सकते हैं. आइए जानते हैं चाणक्य ने अपनी नीति में किन लोगों से बात ना करने की सलाह दी है…
चाणक्य नीति श्लोक
विप्रयोर्विप्रवह्न्योश्च दम्पत्योः स्वामिभृत्ययोः|
अन्तरेण न गन्तव्यं हलस्य वृषभस्य च॥
श्लोक का अर्थ: श्लोक में कहा गया है कि दो ब्राह्मणों के बीच, ब्राह्मण और अग्नि के बीच, पति-पत्नी के बीच, स्वामी और सेवक के बीच और हल और बैल के बीच कभी नहीं चलना चाहिए.
पति-पत्नी के बीच
आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में कहा है कि पति-पत्नी के बीच कभी भी तीसरे व्यक्ति को नहीं आना चाहिए. क्योंकि इन दोनों के बीच की बातचीत के दौरान बोलना या टोकना विवाद को बढ़ा सकता है, जो ना आपके लिए और ना ही इनके लिए अच्छा है. ऐसे में जब पति-पत्नी आपस में बातचीत कर रहे हों या बहसबाजी कर रहे हों तो इनके बीच में बोलने से बचना चाहिए. ज्यादातर ऐसा होता है कि पति-पत्नी बाद में एक साथ हो जाते हैं और आप इनके बीच में आकर बूरे बन जाते हैं.
गुरुओं या विद्वानों के बीच
चाणक्य नीति में कहते हैं कि कभी भी गुरुओं या विद्वानों के बीच में आकर नहीं बोलना चाहिए. दो ज्ञानी व्यक्तियों के बीच चर्चा के दौरान बिना पूछे बोलना अनादर माना जाता है. जब ये बातचीत कर रहे हों तो इनकी बातों को सुनना और समझना चाहिए. क्या पता आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाए. इन दोनों के बीच में आकर बोलने से आप केवल अपना ही नुकसान कर सकते हैं.
मालिक और कर्मचारी के बीच
चाणक्य नीति के आगे कहते हैं कि कभी भी मालिक और कर्मचारी के बीच में आकर नहीं बोलना चाहिए. आधिकारिक बातचीत में दखल देना आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. क्या पता जो उंगली कर्मचारी पर उठ रही थी, बीच में आने पर वह उंगली आप पर उठना शुरू हो जाए. आप बेकार में मालिक के शिकार बन जाएंगे.
ब्राह्मण और अग्नि के बीच
जब ब्राह्मड यज्ञ कर रहा हो तो बीच में आकर बोलने से बचना चाहिए क्योंकि थोड़ी सी भी मंत्रों के शब्दों की हेराफेरी बड़ी परेशानी का कारण बन सकते हैं. इसलिए अगर आपके घर में यज्ञ हो रहा हो और किसी काम के लिए ब्राह्मण को पूछना है तो मंत्र पूरा हो जाने के बाद ही बोलें. इसलिए चाणक्य कहते हैं कि ब्राह्मण और अग्नि के बीच में आने से पूजा भंग हो सकती है.
हल और बैल के बीच
चाणक्य नीति के अंत में कहते हैं जब किसान बैलों की मदद से खेती की जुताई कर रहा हो, वहां हमेशा सतर्कता से आना चाहिए. किसान जब हल चला रहा हो या बैलों को नियंत्रित कर रहा हो तब बातचीत विचलित कर सकती है और काम में एकाग्रता टूट सकती है. ऐसे में चाणक्य कहते हैं कि कभी भी हल या बैल के बीच में नहीं आना चाहिए क्योंकि अगर काम अधूरा रह जाता है तो सभी आपको दोष दे सकते हैं.
चाणक्य ने क्यों दी यह शिक्षा?
चाणक्य का मानना था कि हर परिस्थिति की एक सीमा होती है. बिना अनुमति के दो लोगों के बीच निजी बातचीत में दखल देना सामाजिक शिष्टाचार के विरुद्ध है. गलत समय पर बोलना ना केवल अनादर हो सकता है बल्कि खतरा या विवाद भी पैदा कर सकता है. इसलिए, परिस्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देना बुद्धिमानी है. यह सिद्धांत आज के समय में भी उतना ही महत्वपूर्ण है. सही समय पर चुप रहना ही महान बुद्धिमत्ता है.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


