पुरी रथ यात्रा कब शुरू होगी? भाई-बहन के साथ मौसी के घर जाते हैं भगवान जगन्नाथ, जानें तारीख
पुरी रथ यात्रा कब है? मौसी के घर जाते हैं भगवान जगन्नाथ, जानें तारीख, मुहूर्त
Last Updated:
Jagannath Rath Yatra 2026 Start Date: पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से होता है. इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकलते हैं और मौसी के घर जाते हैं. इनके रथों को गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है. इस रथ यात्रा के लिए 3 विशाल रथ बनाए जाते हैं. आइए जानते हैं कि इस साल रथ यात्रा का शुभारंभ कब है?
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ होता है. (Photo: PTI)
Jagannath Rath Yatra 2026 Start Date: पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का प्रारंभ हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से होता है. इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन शुभद्रा के साथ विशाल रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर जाते हैं. वहां पर वे 5 दिन तक विश्राम करते हैं और फिर उसके अगले दिन से वहां से उनकी उल्टी यात्रा प्रारंभ होती है. फिर वे तीनों जगन्नाथ मंदिर के गर्भ गृह में वापस आ जाते हैं. यह पूरी यात्रा 9 दिनों की होती है, लेकिन इसकी तैयारी काफी दिनों पहले से शुरू हो जाती है. इस रथ यात्रा में शामिल होने के लिए देश और दुनियाभर से श्रद्धालु ओडिशा की राजधानी पुरी पहुंचते हैं.
रथ यात्रा 2026 का प्रारंभ
पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 15 जुलाई दिन बुधवार को 11 बजकर 50 ए एम से प्रारंभ होगी. यह तिथि 16 जुलाई दिन गुरुवार को सुबह 08 बजकर 52 मिनट तक है. ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल द्वितीया 16 जुलाई को है. इस आधार पर पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा शुभारंभ 16 जुलाई से होगा.
2 शुभ योग में निकलेगी रथ यात्रा
इस बार की जगन्नाथ रथ यात्रा 2 शुभ योग में शुरू होगी. 16 जुलाई को सिद्धि योग और रवि योग में रथ यात्रा का प्रारंभ होगा. उस दिन सिद्धि योग प्रात:काल से लेकर 17 जुलाई को 01 बजकर 22 ए एम तक है. इस योग में किए गए कार्य सफल सिद्ध होते हैं. इसके बाद व्यतीपात प्रारंभ होगा.
रथ यात्रा के पहले दिन रवि योग शाम को 07 बजकर 52 मिनट पर बनेगा और यह अगले दिन 17 जुलाई को सुबह 05 बजकर 34 मिनट तक रहेगा.
3 रथों पर सवार होकर मौसी के घर जाएंगे भगवान
नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों पर सवार होते हैं भाई-बहन.
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ अपने विशाल रथ नंदीघोष पर विराजमान होंंगे, वहीं बड़े भाई बलभद्र अपने तालध्वज रथ पर और बहन सुभद्रा दर्पदलन रथ पर सवार होंगी. फिर विधि विधान से उनकी रथ यात्रा शुरू होगी. मोटे रस्सों से उन रथों को खींचा जाएगा. इन विशाल तीनों रथों को गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा. गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर है. वहां पर ये तीनों भाई-बहन 5 दिन तक रहेंगे.
हेरा पंचमी को माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने आती हैं. वहां पर रस्म निभाए जाते हैं. फिर गुंडिचा मंदिर से उल्टी रथ यात्रा शुरू होती है, जिसे बहुदा यात्रा कहते हैं. इसमें तीनों रथों को फिर से खींचकर जगन्नाथ मंदिर लाते हैं.
नीलाद्रि बिजय से होगा रथ यात्रा का समापन
वहां पर सुना बेशा, अधरा पना और नीलाद्रि बिजय जैसी रस्मे होती हैं. सुना बेशा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को आभूषण पहनाते हैं. अधरा पना रस्म में तीनों को एक मीठा पेय पिलाया जाता है. नीलाद्रि बिजय रथ यात्रा का अंतिम उत्सव है, जिसमें जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी और देवी सुभद्रा की पुन: स्थापना करते हैं. इस प्रकार से जगन्नाथ रथ यात्रा का समापन होता है. इस साल 27 जुलाई को नीलाद्रि बिजय है.
About the Author
.jpg?impolicy=website&width=52&height=52)
कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें


