नौतपा के आखिरी 3 दिन बचे, पक्षियों के लिए दाना-पानी रखते समय ना करें ये गलतियां, शनि और रा
नौतपा के आखिरी 3 दिन बचे, पक्षियों के लिए दाना-पानी रखते समय ना करें गलतियां
Last Updated:
Nautapa 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के अंतिम दिनों में किया गया यह छोटा-सा प्रयास ना केवल पक्षियों को राहत पहुंचाता है, बल्कि व्यक्ति के भीतर सेवा और संवेदनशीलता की भावना को भी मजबूत करता है. यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में लोग इस दौरान जीव-जंतुओं के लिए दाना-पानी की व्यवस्था कर पुण्य अर्जित करने का प्रयास करते हैं. आइए जानते हैं नौतपा में किए गए इस काम से क्या लाभ मिलता है…
Nautapa 2026: 25 जून से शुरू हुआ नौतपा अब अपने आखिरी दौर में चल रहा है, अब केवल नौतपा के 3 दिन ही बचें यानी 2 जून को नौतपा का समापन हो जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा के दौरान पड़ने वाली भीषण गर्मी प्रकृति और जीव-जंतुओं के लिए चुनौतीपूर्ण होती है. ऐसे समय में पक्षियों और अन्य जीवों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना ना केवल मानवता का कार्य माना जाता है, बल्कि ज्योतिष शास्त्र में इसे कई ग्रहों की शुभता प्राप्त करने का प्रभावी उपाय भी बताया गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर आप पशु-पंक्षी के लिए दाना-पानी का इंतजाम करके रखते हैं तो ऐसा करने से शनि के साथ राहु और केतु का शुभ प्रभाव मिलेगा और हर इच्छा पूरी होगी. आइए जानते हैं नौतपा में पशु-पंक्षियों के लिए दाना पानी करते समय किन नियमों का ध्यान रखें…
इस दिशा में रखें बर्तन
नौतपा या गर्मी के मौसम में पक्षियों या जानवरों को पानी पिलाना बहुत पुण्य का काम माना जाता है. ऐसे समय में अपनी छत, बालकनी या उत्तर-पूर्व के कोने में मिट्टी के बर्तन साफ पानी और दाना रखना चाहिए. ऐसा करने से राहु-केतु के साथ शनि ग्रह शांत होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है. साथ ही अगर आपका धन अटका हुआ है तो वापस मिलने की पूरी संभावना रहती है. माना जाता है कि जीवों की सेवा करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और ग्रह दोषों से राहत मिलने लगती है.
ऐसी जगह पर बर्तन रखने से बचें
पक्षियों के लिए दाना-पानी हमेशा साफ और सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए. कई लोग छत या बालकनी में ऐसे स्थान पर पानी रख देते हैं जहां तेज धूप पड़ती रहती है. इससे पानी जल्दी गर्म हो जाता है और पक्षियों के लिए उपयोगी नहीं रह जाता. इसलिए पानी का पात्र छायादार स्थान पर रखना बेहतर माना जाता है.
सुबह-शाम जरूर करें यह काम
इसके अलावा बर्तन की नियमित सफाई भी जरूरी है. गंदे पात्र में जमा पानी पक्षियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. हर दिन सुबह और शाम को ताजा पानी भरना और बर्तन को साफ रखना चाहिए. दाना भी ताजा और स्वच्छ होना चाहिए. बासी या खराब अनाज पक्षियों को नुकसान पहुंचा सकता है.
ऐसे बर्तन का करें उपयोग
धार्मिक दृष्टि से मिट्टी के बर्तन का उपयोग शुभ माना गया है. मिट्टी के पात्र में रखा पानी अपेक्षाकृत ठंडा रहता है, जिससे पक्षियों को राहत मिलती है. नौतपा के दौरान मिट्टी के परिंडे या जलपात्र लगाने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है.
ग्रहों का मिलता है शुभ प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र में पक्षियों और जीवों की सेवा को शनि तथा राहु-केतु की शांति से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से जीवों की सेवा करता है, उसके जीवन में आने वाली कई बाधाएं कम होने लगती हैं. विशेष रूप से कौओं, कबूतरों, गौरैया और अन्य पक्षियों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करने से सकारात्मक फल प्राप्त हो सकते हैं.
इन बातों का भी रखें ध्यान
- पानी का पात्र ऐसी जगह रखें जहां बिल्लियों या अन्य शिकारी जानवरों का खतरा ना हो.
- प्लास्टिक की बजाय मिट्टी या धातु के बर्तनों का उपयोग करें.
- प्रतिदिन पानी बदलें और बर्तन साफ करें.
- दाना सीमित मात्रा में रखें ताकि वह खराब ना हो.
- पक्षियों को परेशान किए बिना उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करें.
About the Author

पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


