निर्जला एकादशी में प्यास से सूखे गला, प्राणों पर आ जाए संकट तो फिर कैसे पिएं पानी? जानें
निर्जला एकादशी में प्यास से सूखे गला, प्राणों पर हो संकट तो कैसे पिएं पानी?
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Nirjala Ekadashi 2026 Pani Pine Ke Niyam: निर्जला एकादशी व्रत में अन्न और जल ग्रहण करना पूर्णतया वर्जित है. इसमें पानी पीने से व्रत टूट जाता है. लेकिन प्यास से गला सूखने लगे और प्राणों पर संकट आ जाए तो फिर क्या करें? ऐसी स्थिति में पानी कैसे पी सकते हैं? नियम क्या कहते हैं?
निर्जला एकादशी में पानी कैसे पी सकते हैं?
Nirjala Ekadashi 2026 Pani Pine Ke Niyam: निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन है. जो व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत रखता है, उसके पूरे दिन अन्न और जल नहीं ग्रहण करना होता है. लेकिन समस्या तब आ जाती है कि आप निर्जला एकादशी व्रत हों और प्यास से गला सूख जाए, आपको अपने प्राणों पर ही संकट महसूस होने लगे तो फिर आप क्या करेंगे? इस स्थिति में पानी कैसे पी सकते हैं?
निर्जला एकादशी में पानी क्यों नहीं पीते?
निर्जला एकादशी व्रत के नाम से ही स्पष्ट है कि बिना जल की एकादशी. इसमें अन्न, जल, फल, दूध आदि कुछ नहीं लेते हैं. प्रात:काल में व्रत प्रारंभ के समय आचमन करते हैं, व्रत और पूजा का संकल्प करके उपवास प्रारंभ करते हैं तो अगले दिन सूर्योदय तक जल नहीं ग्रहण करते हैं. तभी आपको सालभर के सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य लाभ और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
निर्जला एकादशी व्रत में किसे है छूट?
निर्जला एकादशी के व्रत में बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोगों को छूट है. निर्जला एकादशी व्रत के समय आपको स्वास्थ्य से संंबंधित कोई समस्या है तो आप जल ग्रहण कर सकते हैं. आप बिना जल के व्रत नहीं रख सकते हैं तो फलाहार करके व्रत रहें और पूजा करें. अपनी क्षमता के अनुसार प्रभु की भक्ति करें. नियमों के अनुसार इस तरह से निर्जला एकादशी व्रत रखने से आपको पूरा फल नहीं मिलेगा, लेकिन प्रभु की भक्ति वर्जित थोड़े ही है.
निर्जला एकादशी में कैसे पिएं पानी?
अब सवाल उन लोगों का है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखें और गला सूख जाए, प्राणों पर संकट आ जाए तो इस स्थिति में क्या करें? पानी कैसे पिएं? इस व्रत की शर्त ही यह है कि आपको बिना जल के यह व्रत पूरा करना है. आप जैसे ही जल ग्रहण करते हैं तो आप व्रत टूट जाता है, वह निष्फल हो सकता है.
लेकिन कुछ धर्माचार्य कहते हैं कि निर्जला एकादशी के दिन भोर में आप उठकर स्नान आदि कर लें और विधि विधान से श्रीहरि की पूजा करें. सूर्यास्त हो जाए तो उसके 2 घंटे बाद जल पी लें. इससे आपको कम से कम 12 एकादशी व्रत का पुण्य मिल सकता है.
हालांकि कुछ जगहों पर यह बताया गया है कि निर्जला एकादशी के दिन प्राणों की संकट की स्थिति में आप पीतल या चांदी के बर्तन में गंगाजल और स्वच्छ जल भर दें. फिर अपने दोनों हाथों और घुटनों को जमीन पर टिकाकर पशु के समान जल पी सकते हैं. उससे पहले आपको ओम नमो नारायणाय मंत्र का जाप 21 बार करना होगा. इसमें दोष नहीं माना जाएगा.
कुछ लोग निर्जला एकादशी को देर रात 12 बजे के बाद थोड़ा सा जल ग्रहण कर लेते हैं.
यह सभी बातें उन लोगों के लिए हैं, जो किसी कारणवश व्रत में पानी पिए बगैर नहीं रह सकते हैं. लेकिन शास्त्रों में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि निर्जला एकादशी में पानी पीने से व्रत भंग हो जाता है.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें


