देवी भागवत पुराण का खुलासा: जानें कौन हैं मां दुर्गा के स्वामी और कैसे हुई इस दिव्य शक्ति

देवी भागवत पुराण का खुलासा: जानें कौन हैं मां दुर्गा के स्वामी और कैसे हुई इस दिव्य शक्ति

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देवी भागवत पुराण का खुलासा: कौन हैं मां दुर्गा के स्वामी और कैसे हुई उत्पत्ति?

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Durga Maa Ke Pati Kaun Hain: मां दुर्गा की नियमित पूजा से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भय, चिंता तथा तनाव कम होते हैं. यह पूजा व्यक्ति को आत्मबल और साहस देती है, जिससे वह कठिन परिस्थितियों का सामना कर पाता है. अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि मां दुर्गा के स्वामी कौन हैं. इस सवाल का उत्तर केवल पारिवारिक संबंधों तक सीमित नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक समझ से जुड़ा हुआ है…

Durga Maa Aur Shiv Ji Se Judi Kathayen: हिंदू धर्म में मां दुर्गा को आदिशक्ति और सृष्टि की मूल ऊर्जा के रूप में पूजा जाता है. वे शक्ति, साहस और संरक्षण की प्रतीक हैं. उनकी पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने का माध्यम भी है. मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई मां दुर्गा की आराधना व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार के लाभ प्रदान करती है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. क्या आप जानते हैं आखिर कौन हैं मां दुर्गा के स्वामी और किस तरह इस दिव्य शक्ति की उत्पत्ति हुई…

सर्वोच्च शक्ति मानी जाती हैं मां दुर्गा – धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां दुर्गा को भगवान भगवान शिव की अर्धांगिनी माना जाता है. इस रूप में वे पार्वती, गौरी और भवानी के नाम से भी जानी जाती हैं. शिव और शक्ति का संबंध अद्वितीय है, दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे माने जाते हैं. इसलिए लौकिक दृष्टि से देखा जाए तो भगवान शिव को मां दुर्गा के स्वामी कहा जाता है. हालांकि, शास्त्र यह भी बताते हैं कि मां दुर्गा केवल एक देवी नहीं, बल्कि स्वयं शक्ति का स्वरूप हैं. वे सृष्टि की मूल ऊर्जा हैं, जिनसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों की शक्तियां उत्पन्न होती हैं. इस दृष्टिकोण से मां दुर्गा किसी एक के अधीन नहीं, बल्कि स्वयं सर्वोच्च शक्ति मानी जाती हैं.

कैसे हुई दिव्य शक्ति की उत्पत्ति? – पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर नामक राक्षस ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और देवताओं को पराजित कर दिया, तब समस्त देवता भगवान विष्णु और शिव की शरण में गए. देवी भागवत पुराण के अनुसार, उस समय ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ इंद्र आदि देवताओं के शरीर से एक दिव्य तेज (ऊर्जा) पुंज निकला. यह दसों दिशाओं को आलोकित करने वाला तेज एक नारी स्वरूप में परिवर्तित हो गया, जिसे हम मां दुर्गा के नाम से जानते हैं. हर देवता ने उन्हें अपनी शक्तियां प्रदान कीं. शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र और हिमालय ने उन्हें सवारी के लिए सिंह भेंट किया.

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कौन हैं मां दुर्गा के स्वामी? – जब कुछ भी नहीं था, तब शिव और शक्ति एक थे लेकिन सृष्टि के निर्माण के लिए शिव और शक्ति अलग हुए. देवी भागवत पुराण के अनुसार, भगवान शिव ही माता दुर्गा के स्वामी हैं. हालांकि यहां स्वामी का अर्थ केवल सांसारिक पति-पत्नी का नहीं, बल्कि शिव (चेतना) और शक्ति (ऊर्जा) के अटूट मिलन का है. पुराण स्पष्ट करता है कि शिव के बिना शक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है और शक्ति के बिना शिव शव के समान हैं. माता दुर्गा वास्तव में भगवान शिव की वह शक्ति हैं जो सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं.

शिव-शक्ति का रहस्य: अर्धनारीश्वर स्वरूप – देवी भागवत पुराण में बताया गया है कि मूलतः शिव और शक्ति एक ही सत्ता के दो रूप हैं. शिव और शक्ति में कोई अंतर नहीं है, शिव ही शक्ति है और शक्ति ही शिव है. सृष्टि के कल्याण के लिए शक्ति ने पार्वती, सती और दुर्गा के रूप में अवतार लिया. भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप इसी बात का प्रमाण है कि आधा शरीर शिव (पुरुष) का है और आधा शक्ति (प्रकृति) का है.

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