घर के मुख्य द्वार के सामने भूलकर भी न रखें ये चीजें, बढ़ सकती हैं परेशानियां

घर के मुख्य द्वार के सामने भूलकर भी न रखें ये चीजें, बढ़ सकती हैं परेशानियां

अंबाला: भारतीय परंपरा में घर के मुख्य द्वार को सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है. दरअसल, वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार के आसपास का वातावरण व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालता है. बता दें कि धार्मिक मान्यता है कि यदि घर के प्रवेश द्वार के सामने कुछ विशेष प्रकार की बाधाएं या संरचनाएं हों, तो इससे वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है, जिसका असर आर्थिक स्थिति, पारिवारिक सुख-शांति और स्वास्थ्य पर पड़ता है. हालांकि, इन मान्यताओं के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग आज भी इनका पालन करते हैं.

घर, उत्तर पूर्व दिशा किस तरफ होना चाहिए

वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि सबसे पहले तो घर, उत्तर पूर्व दिशा किस तरफ होना चाहिए. इसके साथ ही घर का मुख्य द्वार केवल आने-जाने का रास्ता नहीं होता है, बल्कि यही वह स्थान है जहां से सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश माना जाता है. इसलिए मुख्य द्वार के सामने मौजूद चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

मुख्य द्वार के सामने नहीं होनी चाहिए ये चीजें

उनका कहना है कि यदि समय रहते इन वास्तु दोषों पर ध्यान दिया जाए, तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि घर के मुख्य गेट के ठीक सामने बड़ा पेड़ हो तो इसे शुभ नहीं माना जाता है.

मान्यता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है और परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि यदि किसी कारणवश पेड़ को हटाना संभव न हो, तो मुख्य द्वार के पास तुलसी का पौधा लगाना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में तुलसी को पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है.इसी प्रकार मुख्य द्वार के सामने बिजली का खंभा होना भी वास्तु दोष माना जाता है.मान्यता है कि इससे परिवार में तनाव, विवाद और आर्थिक उन्नति में बाधाएं आ सकती हैं.

वास्तु दोष खत्म करने के उपाय

पंडित दीपलाल जयपुरी के अनुसार, ऐसी स्थिति में घर के भीतर क्रिस्टल पिरामिड स्थापित करने या परंपरागत मान्यताओं के अनुसार खंभे पर लाल कपड़ा बांधने जैसे उपाय किए जाते हैं, जिन्हें वास्तु दोष कम करने वाला माना जाता है. उन्होंने कहा कि वास्तु में मुख्य द्वार के ठीक सामने सीधी सड़क का होना भी शुभ नहीं माना गया है. इसे ‘वेध दोष’ कहा जाता है ओर मान्यता है कि ऐसी स्थिति में घर में धन का ठहराव नहीं हो पाता और अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं.वही ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी का कहना है कि इस स्थिति में मुख्य द्वार के सामने हरियाली, सजावटी पौधे या अन्य उपयुक्त अवरोध लगाकर इस प्रभाव को संतुलित करने का प्रयास किया जा सकता है.

उन्होंने बताया कि यदि मुख्य द्वार के सामने खुला नाला, गंदा पानी या जलभराव हो तो वास्तु के अनुसार इसे भी अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है. वहीं व्यावहारिक दृष्टि से भी खुला नाला और जलभराव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं. ऐसे में नाले को ढकवाना, नियमित सफाई रखना और धार्मिक आस्था रखने वाले लोग समय-समय पर गंगाजल का छिड़काव भी करते हैं. इसके अलावा, घर के मुख्य द्वार के सामने कूड़ेदान या कूड़ा-कचरा रखना भी वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना गया है.

मुख्य द्वार के आसपास साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी जरूरी

उन्होंने बताया कि मान्यता है कि इससे नकारात्मकता बढ़ती है और आर्थिक व स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं.वही ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी का कहना है कि चाहे व्यक्ति वास्तु में विश्वास रखता हो या नहीं, लेकिन मुख्य द्वार के आसपास साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना हर दृष्टि से लाभकारी होता है. इससे घर का वातावरण सकारात्मक, आकर्षक और स्वास्थ्यवर्धक बना रहता है.

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