गुरु पूर्णिमा पर गांठ बांध लें चाणक्य की 5 बातें, जीवन में होंगे कामयाब!

गुरु पूर्णिमा पर गांठ बांध लें चाणक्य की 5 बातें, जीवन में होंगे कामयाब!

Guru Purnima 2026: आज 29 जुलाई को देशभर में गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है. इस अवसर पर गुरुजनों की पूजा, आदर और सत्कार करते हैं, ताकि उनका आशीर्वाद बना रहे. विद्यार्थियों का मार्गदर्शन एक गुरु ही करते हैं, उनके ज्ञान से अज्ञानता का अंधकार छटता है. गुरु के ज्ञान से ही व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसलिए कहा गया है- गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः. इसका अर्थ है​ कि गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु ही भगवान महेश हैं, गुरु साक्षात् परब्रह्म हैं, ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं. इस गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आचार्य चाणक्य की कुछ बातें हमें याद रखनी चाहिए, जो सफलता के लिए जरूरी हैं. चाणक्य की ये बातें विद्यार्थियों को जीवन में तरक्की में मदद करेंगी.

गुरु पू​र्णिमा: सफलता के लिए आचार्य चाणक्य के 5 मंत्र

विद्यार्थियों के लिए जरूरी हैं ये आदतें

चाणक्य नीति में विद्यार्थियों के लिए 5 जरूरी आदतों के बारे में बताया गया है. प्रत्येक विद्यार्थी के अंदर हर अच्छी बात को सीखने की चाह होनी चाहिए. इसके अलावा उसके पास पूरी एकाग्रत होनी चाहिए. वह सतर्क होना चाहिए, संतुलित भोजन करने वाला और सुख, मोह, आराम आदि का त्याह करने वाला होना चाहिए. इसके संदर्भ में एक श्लोक भी है.

काकचेष्टा बको ध्यानं श्वाननिद्रा तथैव च।
अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पंचलक्षणम्।।

इसका अर्थ है कि कौए जैसी जिज्ञासा, बगुले जैसा ध्यान, कुत्ते जैसी हल्की नींद, कम या संतुलित भोजन और घर-परिवार का त्याग करना विद्यार्थी के 5 लक्षण हैं.

अपने अंदर के शत्रु को हराएं

चाणक्य ने कहा है कि व्यक्ति को सफलता के लिए स्वयं के अंदर के शत्रु को हराना होगा. व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु उसका आलस्य है. आलस्य की वजह से ही व्यक्ति सफलता नहीं प्राप्त कर पाता है क्योंकि वह परिश्रम से जी चुराता है.

आलस्य हि मनुष्याणां शरीरस्थो महारिपुः।
नास्त्युद्यमसमः बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।।

इसका अर्थ है कि मनुष्य के शरीर का आलस्य ही उसका सबसे बड़ा शत्रु है. व्यक्ति के लिए परिश्रम जैसा कोई दूसरा सच्चा दोस्त नहीं है. जो लोग परिश्रम करते हैं, वे कभी दुखी नहीं होते हैं.

विद्या ही व्यक्ति का सच्चा आभूषण

चाणक्य ने कहा है कि विद्या व्यक्ति का सच्चा आभूषण है, व्यक्ति चाहे कितने भी बड़े घर में क्यों न जन्म ले और वो कितना ही सुंदर क्यों न हो, यदि उसके पास विद्या नहीं, ज्ञान नहीं है तो वो बेकार है.

रूपयौवनसम्पन्ना विलाकुलकुलोद्भवाः।
विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः।।

इसका अर्थ है कि यदि आप कितने भी सुंदर हों, युवा हों और ऊंचे कुल में पैदा हुए हों, लेकिन आप अनपढ़ और अज्ञानी हैं, तो आप उस फूल के समान हैं, जिसमें कोई खुशबू नहीं है और उसे कोई पसंद नहीं करता.

गलत संगत से रहें दूर, नहीं तो लक्ष्य होगा दूर

चाणक्य कहते हैं ​कि आपको कोई लक्ष्य हासिल करना है, करियर में तरक्की करनी है तो आपको गलत संगत से दूर रहना होगा. बुरी संगत ठीक उसे कोयले की तरह है, जो ठंडी होने पर हाथ काला कर देती है और गर्म होने पर हाथ जला देती है.

हर किसी को न बताएं योजनाएं

आपको अपने भविष्य की योजनाओं, रणनीति और लक्ष्यों को गोपनीय रखना चाहिए. जब तक आप अपने कार्य में सफल न हो जाएं, तब तक किसी से न बताएं. दूसरों से अपनी योजनाएं बताने से उसमें बाधाएं आ सकती हैं.

Source link

You May Have Missed