आषाढ़ पूर्णिमा आज, जानें मुहूर्त, लक्ष्मी पूजा, मंत्र, व्रत, नहाने और दान की विधि

आषाढ़ पूर्णिमा आज, जानें मुहूर्त, लक्ष्मी पूजा, मंत्र, व्रत, नहाने और दान की विधि

Ashadha Purnima 2026: आषाढ़ पूर्णिमा आज 29 जुलाई को है. आज आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत और स्नान दान एक साथ है. आज दो शुभ योग प्रीति योग और आयुष्मान योग हैं, जिसमें स्नान और दान करना पुण्य फलदायी है. आज के दिन व्रत रखकर सत्यनारायण भगवान की पूजा करें और कथा सुनें. फिर शाम के समय में माता लक्ष्मी की पूजा करके चंद्रमा को अर्घ्य दें. इससे आपके धन, सुख, वैभव आदि में वृद्धि होगी, वहीं चंद्रमा के मजबूत होने से मनोबल मजबूत होगा, आप सही ​निर्णय लेंगे और मन शांत रहेगा.

आषाढ़ पूर्णिमा 2026 मुहूर्त

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत: 28 जुलाई, मंगलवार, शाम 6:18 बजे
आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 29 जुलाई, बुधवार, रात 8:05 बजे पर
आषाढ़ पूर्णिमा पर स्नान का शुभ समय: प्रात:काल 04:17 बजे से 04:59 बजे के बीच, फिर सूर्योदय 05:41 बजे से सुबह 09:04 बजे तक
2 शुभ योग: प्रीति योग प्रात:काल से रात 11:58 बजे तक, फिर आयुष्मान् योग
लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त: शाम 07:14 बजे से
चंद्र अर्घ्य का समय: शाम को 07:21 बजे के बाद

आषाढ़ पूर्णिमा 2026 स्नान-दान विधि

आज आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर आप नदी स्नान या तीर्थ स्नान करते हैं तो उत्तम है, लेकिन यह मौका नहीं मिलता है तो आप घर पर भी आषाढ़ पूर्णिमा का स्नान कर सकते हैं. आपको नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और कच्चा दूध मिला लेना चाहिए. इससे स्नान करें.

स्नान के बाद आप अपनी क्षमता के अनुसार दान करें. चंद्रमा से संबंधित वस्तुएं जैसे चावल, दूध, शक्कर, सफेद वस्त्र, चांदी, सफेद फूल आदि का दान करना उत्तम रहेगा.

आषाढ़ पूर्णिमा 2026 लक्ष्मी पूजा और चंद्र अर्घ्य

सुबह स्नान और दान के बाद आप आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत रखें. सुबह में सत्यनारायण भगवान की पूजा करें और व्रत कथा सुनें. इस​के बाद दिनभर फलाहार पर रहें. फिर शाम को प्रदोष काल में माता लक्ष्मी के साथ गणेश जी की स्थापना करके पूजा करें.

माता लक्ष्मी को कमलगट्टा, लाल गुलाब या कमल के फूल, सिंदूर, अक्षत्, धूप, दीप, गंध, हल्दी, कौ​ड़ियां, शंख आदि अर्पित करें. वहीं गणेश जी को दूर्वा, पान, सुपारी, रोली, चंदन, अक्षत्, नारियल, धूप, दीप आदि चढ़ाएं. इस दौरान गणेश मंत्र और लक्ष्मी मंत्र का उच्चारण करें. पूर्णिमा व्रत की कथा सुनें. माता लक्ष्मी को खीर, दूध की सफेद मिठाई और गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं.

माता लक्ष्मी के मंत्र ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नम: का जाप करें. चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें. एक लोटे में पानी लें, उसमें कच्चा दूध, अक्षत्, फूल आदि डालें. फिर गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥ मंत्र का जाप करते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दें.

फिर प्रणाम करके मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद लें. फिर कल सुबह सूर्योदय होने पर स्नान आदि से निवृत हो लें. उसके बाद पारण करके व्रत को पूरा कर लें.

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