गलत टाइम पर की गई पूजा-पाठ का नहीं मिलता फल, जानें प्रभु की आराधना का शुभ समय

गलत टाइम पर की गई पूजा-पाठ का नहीं मिलता फल, जानें प्रभु की आराधना का शुभ समय

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Puja Niyam: पूजा-पाठ का एक सही समय होता है, उस समय पर की गई पूजा का फल मिलता है. कई बार लोग ये जान ही नहीं पाते हैं कि पूजा किस समय पर की जाए तो चलिए यहां बताते हैं कि पूजा का सबसे सही समय क्या होता है.

पूजा नियम

हाइलाइट्स

  • सुबह और शाम को पूजा करना शुभ माना जाता है.
  • दोपहर के समय पूजा करने से बचना चाहिए.
  • दोपहर में देवताओं का विश्राम समय होता है.

Puja Niyam: भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. पूजा करने का भी एक निर्धारित समय होता है. सुबह और शाम को पूजा करना शुभ माना जाता है, लेकिन दोपहर के समय पूजा करने से बचना चाहिए. इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण बताए गए हैं. पूजा का अगर पूर्ण फल चाहिए तो किस समय पूजा करनी चाहिए इस पर जानकारी दे रहे हैं पंडित अनिल शर्मा.

धार्मिक कारण:
देवताओं का विश्राम: हिंदू धर्म में दोपहर का समय देवताओं के विश्राम का समय माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस समय देवताओं को आराम करने दिया जाना चाहिए और उनकी पूजा में विघ्न नहीं डालना चाहिए.

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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक का समय अभिजीत मुहूर्त कहलाता है. यह समय पितरों का होता है और इस समय पितरों की पूजा की जाती है. इसलिए इस समय देवताओं की पूजा नहीं करनी चाहिए.

नारायण का समय: शाम 4 बजे तक का समय नारायण का समय होता है. इस समय भी पूजा करने से बचना चाहिए.

वैज्ञानिक कारण:

शरीर की शुद्धि: दोपहर के समय हमारे शरीर की शुद्धि की प्रक्रिया चल रही होती है. इसलिए इस समय पूजा करने से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सही नहीं रहता है.

मानसिक एकाग्रता: दोपहर के समय हमारा मन और मस्तिष्क शांत नहीं रहते हैं. इसलिए इस समय पूजा करने से पूजा में मन नहीं लगता है.

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शास्त्रों में वर्णित नियम:
शास्त्रों में दोपहर के समय पूजा करने से बचने के बारे में कई नियम बताए गए हैं. इन नियमों का पालन करना हमारे लिए शुभ होता है.

जान लें यह जरूरी बात
दोपहर के समय पूजा करने से बचना चाहिए. यह देवताओं के विश्राम का समय होता है और इस समय पूजा करने से देवताओं का ध्यान भंग हो सकता है. इसके अलावा दोपहर के समय हमारे शरीर की शुद्धि की प्रक्रिया भी चल रही होती है और इस समय पूजा करने से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सही नहीं रहता है. इसलिए हमें सुबह और शाम को ही पूजा करनी चाहिए, यही हमारे लिए शुभ होता है.

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