खुद को समझते हैं बुद्धिमान, तो चेक कर लें क्या आप में है इन 10 बातों में से कोई भी एक
Signs Of Intelligence: हर व्यक्ति स्वयं को दूसरे से अधिक समझदार और बुद्धिमान समझता है. यह मनुष्य का सहज स्वभाव है. लेकिन बुद्धिमान होना आपके स्वयं समझ तक सीमित नहीं है. कई बार बुद्धिमान लोगों के फैसले उनको मूर्ख की श्रेणी में ला देते हैं. कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति की बुद्धि भी काम नहीं करती है और उसे उससे बाहर निकलने के लिए दूसरे के सुझाव या मदद की जरूरत पड़ती है. अब महाभारत की उस घटना को ही देखें कि युधिष्ठिर जैसा बुद्धिमान व्यक्ति शकुनि और कौरवों की चाल में फंस जाता है और जुए में अपनी पत्नी सहित सबकुछ हार बैठता है. ऐसे कई उदाहरण आपको देखने को मिल जाएंगे, जब बुद्धिमान लोग भी बुद्धिहीन जैसे कार्य करते हैं. ऐसे में कैसे समझा जाए कि कौन बुद्धिमान है और कौन मूर्ख है?
बुद्धिमान लोगों की 10 खास बातें
1. जो व्यक्ति क्रोध में, खुशी में, गर्व के पल में और लज्जा की स्थिति में भी स्वयं को एक समान रख पाता है. जो स्वयं को सब में श्रेष्ठ समझने की गलती नहीं करता है और अपने सच्चे कर्म को करता है, उसे ही बुद्धिमान या पंडित कहा गया है.
2. बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी अपने किए गए अच्छे कर्मों का ढिंढोरा नहीं पिटते हैं और वे अपने कार्यों को जब पूरा कर लेते हैं तो उससे लोगों को पता चलता है. उनके शब्द नहीं कर्म बोलते हैं.
3. जिस व्यक्ति को अपने वास्तविकता का पूर्ण ज्ञान होता है, जो दुख की घड़ी में भी विचलित नहीं होता है, दुख को सहन करने की शक्ति रखता है, अपने धर्म में स्थिर रहता है, इन गुणों के होने के बाद भी वह अपने पुरुषार्थ को नहीं छोड़ता है, वही सच्चा पंडित या ज्ञानी होता है.
4. जिस व्यक्ति को परिस्थितियां विवश नहीं करती हैं. जो अपने कार्य को सर्दी, गर्मी, भय, प्रेम, धन या दरिद्रता को सोचे बगैर करता है, इनसे प्रभावित नहीं होता है, वही बुद्धिमान है.
5. जो व्यक्ति बुद्धिमान होता है, वह अपनी शक्ति के अनुसार काम करने की इच्छा रखता है और उसे करता भी है. लेकिन वो किसी को बेकार या तुच्छ नहीं समझता है और न ही उसका अपमान करता है.
6. जो बुद्धिमान होते हैं, वे दूसरों की बातों को ध्यान से सुनते हैं और जल्द ही पूरा मामला समझ लेते हैं कि सामने वाले का उद्देश्य क्या है. उसे समझकर ही वे अपना कर्म करते हैं. वे बिना पूछे दूसरों के बारे में बेकार की बातें नहीं करते हैं. यह स्वभाव एक पंडित की पहचान है.
7. जो व्यक्ति अपना सम्मान होने पर गर्व से नहीं भरता, अपमान होने पर दुखी नहीं होता है, जिसके मन को कोई दुख, व्याकुलता या क्षोभ नहीं होता है. श्रेष्ठ और उन्नति के कार्य करता है, परोपकार करने वालों की निंदा नहीं करता या उनके दोष नहीं देखता है, वह बुद्धिमान होता है. शास्त्रों में उसे पंडित कहा गया है.
8. जो भौतिक वस्तुओं की वास्तविकता का सही ज्ञान रखता है, सभी कार्यों को करने का ढंग जानता है, निश्चय करके अपना कार्य करता है और उसे बीच में नहीं छोड़ता है, समय को नहीं गंवता है और अपने मन को वश में रखता है, उसे ही बुद्धिमान कहा गया है.
9. जो बिना पढ़े ही गर्व नहीं करता है, बिना कर्म किए ही धन पाने की चाह नहीं रखता है, शिष्ट व्यक्तियों की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता है, तर्क करने में माहिर और प्रतिभाशाली होता है, वह बुद्धिमान कहलाने के योग्य होता है.
10. जो मनुष्य खो गई वस्तु का शोक या दुख नहीं करते हैं, दुर्लभ वस्तु की चाह नहीं रखते हैं, विपत्ति आने पर भी स्थिर रहते हैं, भोग को छोड़कर पुरुषार्थ करते हैं, बुरे कर्मों से स्वयं को दूर रखते हैं, ऐस लोग पंडित कहलाते हैं.


