काला नजरबट्टू, घोड़े की नाल या तांबे का सूर्य? वास्तु में क्या है सबसे असरदार
अंबाला: घर के मुख्य द्वार को वास्तु शास्त्र और धार्मिक परंपराओं में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां से घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है. इसी कारण लोग अपने घर को बुरी नजर और नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए मुख्य द्वार पर विभिन्न प्रतीकात्मक वस्तुएं लगाते हैं. इनमें काला नजरबट्टू, पुराना जूता, तांबे का सूर्य और घोड़े की नाल सबसे अधिक प्रचलित हैं. हालांकि सवाल यह उठता है कि इन उपायों में से कौन-सा वास्तव में शास्त्रसम्मत और अधिक प्रभावी माना जाता है.
घर के बाहर पुराना जूता क्यों लटकाते हैं
दरअसल, देश के कई हिस्सों में आज भी लोग घर या दुकान के बाहर पुराना जूता लटकाते हैं. इसे बुरी नजर से बचाव का उपाय माना जाता है. हालांकि, धार्मिक ग्रंथों और वास्तु शास्त्र में इस परंपरा का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है.
वहीं, इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार फटा, पुराना और गंदा जूता मुख्य द्वार पर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है. इसलिए इसे शास्त्रीय उपाय की बजाय केवल लोक-परंपरा या टोटका माना जाता है.
क्या सच में होता है इनसे फायदा
उन्होंने कहा कि इसी तरह काला नजरबट्टू, नींबू-मिर्च और मुखौटे जैसी वस्तुएं भी लंबे समय से लोक आस्था का हिस्सा रही हैं. लोगों का विश्वास है कि ये बुरी नजर को रोकने में सहायक होती हैं, हालांकि, धर्मग्रंथों में इन्हें अत्यंत प्रभावशाली उपाय के रूप में विशेष महत्व नहीं दिया गया है. इसलिए इनका प्रभाव मुख्य रूप से विश्वास और परंपरा पर आधारित माना जाता है.
मुख्य द्वार पर लगाएं तांबे का सूर्य
उन्होंने कहा कि वास्तु और ज्योतिष विद्या के अनुसार तांबे का सूर्य सबसे शुभ प्रतीकों में से एक माना जाता है, क्योंकि तांबा सूर्य ग्रह की धातु माना जाता है और इसे पवित्रता, तेज, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इसलिए मुख्य द्वार पर तांबे का सूर्य लगाने से घर में उज्ज्वल ऊर्जा का संचार होने, सम्मान में वृद्धि तथा मानसिक मजबूती आने की मान्यता है. यही कारण है कि इसे शास्त्रसम्मत और व्यवस्थित उपाय माना जाता है.
घोड़े का नाल भी शुभ
उन्होंने कहा कि घोड़े की नाल भी भारतीय परंपराओं में सुरक्षा और शुभता का प्रतीक मानी जाती है. विशेष रूप से काले घोड़े की पुरानी नाल को मुख्य द्वार पर लगाने की परंपरा काफी लोकप्रिय है. मान्यता है कि इसे शनिवार के दिन उत्तर या पश्चिम दिशा में लगाने से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और शनि संबंधी बाधाओं में राहत मिलती है.
उन्होंने बताया कि यदि शास्त्रीय और वास्तु दृष्टिकोण से देखा जाए, तो फटा जूता सबसे कम विश्वसनीय उपाय माना जाता है, जबकि काला नजरबट्टू लोकविश्वास पर आधारित है. इसके विपरीत, तांबे का सूर्य सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होने के कारण अधिक प्रभावी माना जाता है और घोड़े की नाल पारंपरिक मान्यताओं में अत्यंत लोकप्रिय है.
पंडित दीपलाल का मानना है कि केवल प्रतीकात्मक वस्तुएं लगाने से ही घर का वातावरण नहीं बदलता, बल्कि घर की नियमित साफ-सफाई, पूजा-पाठ, सकारात्मक सोच और परिवार के सदस्यों का सदाचार भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उनका कहना है कि धार्मिक परंपराएं भी यही बताती हैं कि बाहरी उपायों से अधिक प्रभाव सात्विक जीवनशैली और शुभ आचरण का होता है.


