करियर में रुकावट की वजह कहीं पिता से बिगड़े रिश्ते तो नहीं? अनादर सबसे घातक

करियर में रुकावट की वजह कहीं पिता से बिगड़े रिश्ते तो नहीं? अनादर सबसे घातक

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Astro Tips : क्या आप भी कड़ी मेहनत के बाद भी करियर में पीछे रह गए हैं. वैदिक ज्योतिष का मानना है कि सफलता केवल परिश्रम से ही नहीं, बल्कि जीवन के कुछ रिश्तों से भी जुड़ी है. वैदिक ज्योतिष में सूर्य को पिता, आत्मबल, नेतृत्व और अनुशासन का कारक ग्रह माना गया है. लोकल 18 से अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि अगर पिता के साथ संबंध मधुर हों तो भाग्य मजबूत होता है. इसका सीधा लाभ व्यक्ति के कर्मक्षेत्र यानी करियर में दिखाई देता है. दशम भाव व्यक्ति के कर्म, नौकरी, व्यवसाय और सामाजिक प्रतिष्ठा का संकेत देता है. पिता के साथ रिश्तों में कटुता, अनादर या दूरी हो तो इसका असर दशम भाव पर भी पड़ सकता है.

अंबाला. हर व्यक्ति अपने करियर में सफलता, अच्छी नौकरी और आर्थिक उन्नति की इच्छा रखता है. इसके लिए लोग कड़ी मेहनत करने के साथ-साथ कई तरह के ज्योतिषीय उपाय भी अपनाते हैं. हालांकि, वैदिक ज्योतिष का मानना है कि सफलता केवल परिश्रम से ही नहीं, बल्कि जीवन के कुछ महत्वपूर्ण रिश्तों से भी जुड़ी होती है. इनमें सबसे अहम स्थान पिता-पुत्र के रिश्ते का बताया गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि पिता के साथ संबंध मधुर हों तो भाग्य मजबूत होता है और इसका सीधा लाभ व्यक्ति के कर्मक्षेत्र यानी करियर में दिखाई देता है. लोकल 18 से अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि वैदिक ज्योतिष में सूर्य को पिता, आत्मबल, नेतृत्व और अनुशासन का कारक ग्रह माना गया है. जबकि कुंडली का नौवां भाव पिता, गुरु, धर्म और भाग्य का प्रतिनिधित्व करता है.

नौवां और दशम भाव 

पंडित दीपलाल के मुताबिक, दशम भाव व्यक्ति के कर्म, नौकरी, व्यवसाय और सामाजिक प्रतिष्ठा का संकेत देता है,. नौवें और दशम भाव का आपसी संबंध यह स्पष्ट करता है कि पिता का आशीर्वाद व्यक्ति के करियर की मजबूती का आधार बन सकता है. अगर कुंडली का नौवां भाव मजबूत है तो व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलता है. यही भाग्य उसे कर्मक्षेत्र में आगे बढ़ने की शक्ति देता है. इसके विपरीत यदि पिता के साथ रिश्तों में कटुता, अनादर या दूरी हो तो इसका असर दशम भाव पर भी पड़ सकता है, जिससे नौकरी, व्यवसाय या पदोन्नति में बाधाएं आने लगती हैं. यही कारण है कि वैदिक ज्योतिष में पिता को केवल पारिवारिक सदस्य नहीं, बल्कि जीवन की प्रगति का आधार माना गया है.

पिता और बेटे की कुंडली

पंडित दीपलाल जयपुरी का कहना है कि कालपुरुष कुंडली के अनुसार जो व्यक्ति अपने पिता का सम्मान करता है, उनकी सेवा करता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करता है, उसका दशम भाव स्वतः मजबूत होने लगता है. इससे कार्यक्षेत्र में नई संभावनाएं बनती हैं और सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है. चतुर्थ भाव जहां माता का प्रतिनिधित्व करता है, दशम भाव का संबंध पिता और कर्म दोनों से माना गया है. सूर्य जब दशम भाव में प्रभावशाली स्थिति में होता है तो व्यक्ति को नेतृत्व क्षमता, मान-सम्मान और करियर में उल्लेखनीय उपलब्धियां मिलने की संभावना रहती है. ज्योतिषीय दृष्टि से पिता और पुत्र की कुंडलियों का आपसी संबंध भी महत्वपूर्ण माना गया है. यदि पुत्र की कुंडली का लग्न पिता की कुंडली के छठे भाव से संबंध बनाता है तो पिता को पुत्र के कारण अनावश्यक तनाव और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

सुबह उठकर करें ये काम

कुछ विशेष ग्रह स्थितियां पिता-पुत्र के रिश्तों में मतभेद, दूरी और मानसिक तनाव का कारण भी बनती हैं, जिसका असर दोनों के जीवन पर दिखाई देता है. करियर में लगातार बाधाओं का सामना कर रहे लोगों के लिए सबसे पहले पिता के साथ संबंध सुधारने की जरूरत है. पंडित दीपलाल बताते हैं कि प्रतिदिन सुबह पिता के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए. इससे सूर्य की स्थिति मजबूत होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और नौकरी व व्यवसाय में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होने लगते हैं. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, पिता का सम्मान केवल एक संस्कार नहीं, बल्कि भाग्य और कर्म को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम भी है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें

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