आईआईटी बाबा अभिषेक का गोरखधंधा, गंधर्व विवाह के नाम पर 24 युवतियों से गंदा काम

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आईआईटी बाबा अभिषेक का गोरखधंधा, गंधर्व विवाह के नाम पर 24 युवतियों से गंदा काम

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Gandharva Vivah Rules: गंधर्व विवाह सनातन परंपरा में वर्णित एक सम्मानित वैवाहिक व्यवस्था है, जिसकी नींव प्रेम, सहमति और जिम्मेदारी पर टिकी हुई है. राजा दुष्यंत और शकुंतला की कथा इसका प्रमुख उदाहरण मानी जाती है, जबकि भगवान कृष्ण के कुछ प्रसंगों में भी इसके हिस्से देखे जाते हैं. लेकिन शास्त्र कहीं भी गंधर्व विवाह को मनमाने संबंधों या धार्मिक दावों के सहारे निजी स्वार्थ पूरा करने का माध्यम नहीं बताते.

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गंधर्व विवाह क्या होता है?

Gandharva Vivah Rules: जब भी किसी विवाद में धर्म, भगवान और शास्त्रों का नाम जुड़ जाता है, तब लोगों की जिज्ञासा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है. इन दिनों चर्चा में आए आईआईटी बाबा अभिषेक को लेकर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. दावा किया जा रहा है कि उन्होंने खुद को भगवान कृष्ण का अवतार बताया और गंधर्व विवाह का हवाला देकर कई युवतियों के साथ संबंधों को उचित ठहराने की कोशिश की. इस पूरे विवाद ने एक पुराने शास्त्रीय शब्द को फिर चर्चा में ला दिया है. आखिर गंधर्व विवाह क्या होता है? क्या भगवान कृष्ण ने गंधर्व विवाह किया था? और क्या सामान्य व्यक्ति भी इसके नाम पर एक से अधिक विवाह कर सकता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए शास्त्रों की ओर देखना जरूरी है.

शास्त्रों में बताए गए हैं विवाह के आठ प्रकार
सनातन धर्म के ग्रंथों, विशेष रूप से मनुस्मृति और अन्य धर्मशास्त्रों में विवाह के आठ प्रकारों का उल्लेख मिलता है. इनमें ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्राजापत्य, गंधर्व, असुर, राक्षस और पैशाच विवाह शामिल हैं. इनमें गंधर्व विवाह को ऐसा विवाह माना गया है जिसमें स्त्री और पुरुष अपनी इच्छा से, बिना किसी दबाव के, एक-दूसरे को पति-पत्नी के रूप में स्वीकार करते हैं. आधुनिक भाषा में इसे प्रेम विवाह का प्राचीन स्वरूप कहा जा सकता है. हालांकि शास्त्र यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह केवल आकर्षण या संबंध का नाम नहीं है, बल्कि वैवाहिक जिम्मेदारियों को स्वीकार करने का संकल्प भी है.

गंधर्व विवाह का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण
राजा दुष्यंत और शकुंतला की कथा
महाभारत और कालिदास के प्रसिद्ध नाटक ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ में राजा दुष्यंत और शकुंतला का विवाह गंधर्व विवाह का सबसे चर्चित उदाहरण माना जाता है. दोनों ने परस्पर सहमति से एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार किया था. यह उदाहरण बताता है कि गंधर्व विवाह केवल प्रेम नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक उत्तरदायित्व से भी जुड़ा हुआ था. बाद में दुष्यंत द्वारा शकुंतला को स्वीकार करने और उनके पुत्र भरत के जन्म की कथा भारतीय इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी.

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भगवान कृष्ण और गंधर्व विवाह का क्या संबंध है?
भगवान कृष्ण के जीवन में रुक्मिणी विवाह का प्रसंग विशेष रूप से प्रसिद्ध है. भागवत पुराण के अनुसार रुक्मिणी ने स्वयं कृष्ण को अपना पति मान लिया था और संदेश भेजकर उनसे विवाह की इच्छा व्यक्त की थी. इसके बाद कृष्ण उन्हें अपने साथ ले गए. कई विद्वान इस प्रसंग में गंधर्व विवाह के तत्व देखते हैं क्योंकि इसमें दोनों की सहमति प्रमुख थी. हालांकि अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इसकी व्याख्या अलग तरीके से की जाती है. इसलिए इसे पूरी तरह गंधर्व विवाह घोषित करना सर्वमान्य मत नहीं है. धर्माचार्यों का कहना है कि भगवान कृष्ण के जीवन प्रसंगों को समझते समय उनके दिव्य स्वरूप और उस युग की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए.

क्या भगवान ही कई गंधर्व विवाह कर सकते थे?
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि यदि भगवान कृष्ण की अनेक पत्नियां थीं तो क्या सामान्य व्यक्ति भी ऐसा कर सकता है? धार्मिक विद्वानों के अनुसार भगवान के अवतारों के जीवन और सामान्य मनुष्यों के जीवन के नियम एक जैसे नहीं माने जाते. पुराणों में वर्णित दिव्य लीलाओं का उद्देश्य आध्यात्मिक संदेश देना होता है, न कि उन्हें हर परिस्थिति में सामाजिक नियम बना देना. यही कारण है कि भगवान कृष्ण के जीवन के उदाहरण को आधार बनाकर कोई व्यक्ति अपने निजी आचरण को स्वतः उचित नहीं ठहरा सकता.

आधुनिक कानून क्या कहता है?
आज के भारत में विवाह की वैधता धार्मिक व्याख्याओं से ज्यादा कानूनी प्रावधानों में तय होती है. हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार जीवित जीवनसाथी के रहते दूसरा विवाह सामान्य परिस्थितियों में वैध नहीं माना जाता. ऐसे में गंधर्व विवाह का नाम लेकर एक से अधिक विवाह या संबंधों को कानूनी मान्यता नहीं मिल जाती. शास्त्र भी किसी प्रकार के छल, धोखे या शोषण को धर्म नहीं मानते.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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Keerti Rajpoot

मीडिया की दुनिया में मेरा सफर एक रेडियो जॉकी के रूप में शुरू हुआ था, जहां शब्दों की ताकत से श्रोताओं के दिलों तक पहुंच बनाना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही. माइक के पीछे की यह जादुई दुनिया ही थी जिसने मुझे इलेक्ट्र…और पढ़ें

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