अक्षय तृतीया पर करें श्री लक्ष्मीनारायण आरती…जय लक्ष्मी-विष्णो, जय लक्ष्मीनारायण
Lakshmi Narayan Aarti Benefits: अक्षय तृतीया आज 19 अप्रैल को मनाई जा रही है. अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. इस दिन लक्ष्मीनारायण की पूजा करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है. कष्टों से मुक्ति मिलती है और पाप मिट जाते हैं. अक्षय तृतीया की पूजा के समय श्री लक्ष्मीनारायण की आरती करनी चाहिए. श्री लक्ष्मीनारायण की कई आरती हैं, लेकिन हम आपको यहां पर जय लक्ष्मी-विष्णो, जय लक्ष्मीनारायण…वाली आरती दे रहे हैं. घी के दीपक या कपूर जलाकर श्री लक्ष्मीनारायण की आरती कर सकते हैं.
श्री लक्ष्मीनारायण आरती (Lakshmi Narayan Aarti Lyrics)
जय लक्ष्मी-विष्णो, जय लक्ष्मीनारायण,
जय लक्ष्मी-विष्णो, जय माधव, जय श्रीपति,
जय, जय, जय विष्णो॥ जय लक्ष्मी-विष्णो…
जय चम्पा सम-वर्णेजय नीरदकान्ते।
जय मन्द स्मित-शोभेजय अदभुत शान्ते॥ जय लक्ष्मी-विष्णो…
कमल वराभय-हस्तेशङ्खादिकधारिन्।
जय कमलालयवासिनिगरुडासनचारिन्॥ जय लक्ष्मी-विष्णो…
सच्चिन्मयकरचरणेसच्चिन्मयमूर्ते।
दिव्यानन्द-विलासिनिजय सुखमयमूर्ते॥ जय लक्ष्मी-विष्णो…
तुम त्रिभुवन की माता, तुम सबके त्राता।
तुम लोक-त्रय-जननी, तुम सबके धाता॥ जय लक्ष्मी-विष्णो…
तुम धन जन सुखसन्तित जय देने वाली।
परमानन्द बिधाता तुम हो वनमाली॥ जय लक्ष्मी-विष्णो…
तुम हो सुमति घरों में, तुम सबके स्वामी।
चेतन और अचेतनके अन्तर्यामी॥ जय लक्ष्मी-विष्णो…
शरणागत हूं मुझ परकृपा करो माता।
जय लक्ष्मी-नारायणनव-मन्गल दाता॥ जय लक्ष्मी-विष्णो…
श्री लक्ष्मीनारायण आरती का हिंदी अर्थ (Lakshmi Narayan Aarti Meaning)
आरती की पहली पंक्ति जय लक्ष्मी-विष्णो, जय लक्ष्मीनारायण… का अर्थ है कि माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की जय हो. लक्ष्मी जी और नारायण की जय हो. माधव और श्रीपति यानि माता लक्ष्मी के स्वामी आपकी बारंबार जय हो.
दूसरी पंक्ति जय चम्पा सम-वर्णे, जय नीरदकान्ते… का अर्थ है कि चंपा के फूल के समान स्वर्ण वर्ण वाली माता लक्ष्मी की जय हो, बादलों के समान श्याम वर्ण वाले श्री विष्णु की जय हो. आपकी मुस्कान अत्यंत शोभा वाली है, आपके स्वरूप में एक शांति है.
तीसरी पंक्ति कमल वराभय-हस्ते, शङ्खादिकधारिन्…का अर्थ है कि जो माता लक्ष्मी अपने हाथों में कमल धारण करती हैं, जिनके हाथ वर और अभय मुद्रा में होते हैं, उनकी जय हो. जो भगवान विष्णु अपने हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं, उनकी भी जय हो. कमल पर विराजमान होने वाली माता लक्ष्मी और पक्षीरात गरुड़ पर सवारी करने वाले भगवान विष्णु की जय हो.
चौथी पंक्ति सच्चिन्मयकरचरणे, सच्चिन्मयमूर्ते…का अर्थ है कि आप दोनों यानि माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनो का स्वरूप सत्य, चित्त और आनंद वाला है, आपके हाथ-पैर दिव्य चेतना वाले हैं. हे माता लक्ष्मी आप दिव्य आनंद में विलास करती हैं तो भगवान विष्णु स्वयं सुख प्रदान करने वाले मूर्ति हैं.
पांचवी पंक्ति तुम त्रिभुवन की माता, तुम सबके त्राता…का अर्थ है कि हे माता लक्ष्मी, आप तीनों लोकों की माता हैं. वहीं भगवान विष्णु, आप हम सभी के रक्षक हैं. हे माता लक्ष्मी, आप तीनों लोकों की जननी हैं, तो श्री हरि विष्णु सबके पालनकर्ता हैं.
छठी पंक्ति तुम धन जन सुखसन्तित, जय देने वाली…का अर्थ है कि हे माता लक्ष्मी आप धन, सुख, ऐश्वर्य और संतान देने वाली हैं, वहीं भगवान विष्णु परम आनंद देने वाले हैं.
सातवी पंक्ति तुम हो सुमति घरों में, तुम सबके स्वामी… का अर्थ है कि आप माता लक्ष्मी घरों में श्रेष्ठ बुद्धि रूप में रहती हैं, वहीं हे भगवान विष्णु आप इस संसार के स्वामी हैं. आप हर जीव के मन की बात जानने वाले ईश्वर हो.
आठवी पंक्ति शरणागत हूं मुझ पर, कृपा करो माता… का अर्थ है कि हे माता लक्ष्मी मैं आपकी शरण में हूं, आप मुझ पर कृपा करें. हे लक्ष्मी और नारायण, आप जीवन में रोज नए मंगल और कल्याण करने वाले हैं. आप दोनों की जय हो.


