Skand Shashthi 2025 Date: स्कंद षष्ठी कब है? रवि योग में होगी पूजा, जानें तारीख, मंत्र और महत्व

Skand Shashthi 2025 Date: स्कंद षष्ठी कब है? रवि योग में होगी पूजा, जानें तारीख, मंत्र और महत्व

स्कंद षष्ठी का व्रत हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है. यह व्रत भगवान शिव के बड़े पुत्र भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्ति के लिए रखा जाता है. इस बार भाद्रपद या अगस्त के स्कंद षष्ठी व्रत के दिन रवि योग बन रहा है. स्कंद षष्ठी का व्रत रखने से संतान सुख, संतान की सुरक्षा, उत्तम सेहत की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं कि स्कंद षष्ठी व्रत कब है? स्कंद षष्ठी व्रत का मुहूर्त, पूजा मंत्र क्या है?

स्कंद षष्ठी व्रत की तारीख
अगस्त माह का स्कंद षष्ठी व्रत 28 अगस्त दिन गुरुवार को है. पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी ति​थि का प्रारंभ 28 अगस्त को शाम 05 बजकर 56 मिनट पर होगा. इस तिथि का समापन 29 अगस्त दिन शुक्रवार को रात 08 बजकर 21 मिनट पर होगा. स्कंद षष्ठी पूजा मुहूर्त के आधार पर स्कंद षष्ठी व्रत 28 अगस्त को रखा जाएगा.

स्कंद षष्ठी व्रत का शुभ मुहूर्त
स्कंद षष्ठी व्रत की पूजा शाम के समय में होता है. 28 अगस्त को स्कंद षष्ठी की पूजा का मुहूर्त सूर्यास्त के बाद यानि 06:47 पी एम से है. स्कंद षष्ठी पर ब्रह्म मुहूर्त 04:28 ए एम से 05:12 ए एम तक है.

उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक है. षष्ठी का निशिता मुहूर्त देर रात 12:00 पी एम से 12:45 ए एम तक है.

3 शुभ योग में स्कंद षष्ठी व्रत
स्कंद षष्ठी व्रत पर 3 शुभ योग बन रहे हैं. स्कंद षष्ठी व्रत के दिन रवि योग, शुक्ल योग और ब्रह्म योग बनेंगे. रवि योग सुबह में 08:43 ए एम से बनेगा, जो 29 अगस्त को 05:58 ए एम पर खत्म होगा.

व्रत वाले दिन शुक्ल योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 01:18 पी एम तक है, उसके बाद ब्रह्म योग बनेगा. स्कंद षष्ठी पर चित्रा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 08:43 ए एम तक है, उसके बाद से स्वाति नक्षत्र है, तो पूर्ण रात्रि तक है.

स्कंद षष्ठी पूजा मंत्र
स्कंद षष्ठी की पूजा के समय ॐ सारवनभवाय नमः या ॐ स्कन्दाय नमः मंत्र का जप करें.

स्कंद षष्ठी व्रत के फायदे

1. स्कंद षष्ठी व्रत करने से संतान की प्राप्ति होती है और बच्चों की सुरक्षा होती है.

2. शक्ति और साहस की प्राप्ति के लिए स्कंद षष्ठी व्रत करते हैं. साहस, आत्मबल और आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी होती है.

3. भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से पिछले जन्मों के पाप मिटते हैं.

4. इस व्रत से मंगल और केतु से जुड़े दोष मिटते हैं और कष्ट दूर होते हैं.

5. रोग, भय और पाप से मुक्ति मिलती है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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