Shani Pradosh Vrat Katha : शनि प्रदोष व्रत कथा, यहां पढ़ने व सुनने मात्र से हर कष्ट होंगे दूर और आएगी सुख-समृद्धि

Shani Pradosh Vrat Katha : शनि प्रदोष व्रत कथा, यहां पढ़ने व सुनने मात्र से हर कष्ट होंगे दूर और आएगी सुख-समृद्धि

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Shani Pradosh Vrat Katha : शनि प्रदोष व्रत का महत्व शास्त्रों में अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है. इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करने से सभी कष्ट व परेशानियों से मुक्ति मिलती है और फिर कथा पढ़ने व सुनने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है. आइए पढ़ते हैं शनि प्रदोष व्रत कथा के बारे में…

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Shani Pradosh Vrat Katha in Hindi : प्रदोष व्रत हर महीने दोनों पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. जब यह व्रत शनिवार को आता है तो इसे शनि प्रदोष कहते हैं. इसमें भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से की जाती है और शनि देव भी प्रसन्न होते हैं. शनि प्रदोष व्रत की कथा और उसका महत्व शास्त्रों में विशेष रूप से वर्णित है. इस कथा के सुनने व पढ़ने मात्र से ही जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं और हर कष्ट से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं शनि प्रदोष व्रत की कथा के बारे में…

शनि प्रदोष व्रत कथा (Shani Pradosh Vrat Katha)

शनि प्रदोष व्रत कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक नगर सेठजी रहते थे. सेठजी के घर में हर प्रकार की सुख-सुविधाएं थीं लेकिन संतान ना होने वजह से सेठ और सेठानी हमेशा दुखी रहते थे. काफी सोच-विचार करके सेठजी ने अपना काम नौकरों को सौंप दिया और खुद सेठानी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े.

अपने नगर से बाहर निकलने पर सेठजी को एक साधु मिले, जो ध्यानमग्न बैठे थे. सेठजी ने सोचा, क्यों ना साधु से आशीर्वाद लेकर आगे की यात्रा की जाए. सेठ और सेठानी साधु के निकट बैठ गए. साधु ने जब आंखें खोलीं तो उन्हें ज्ञात हुआ कि सेठ और सेठानी काफी समय से आशीर्वाद की प्रतीक्षा में बैठे हैं. साधु ने सेठ और सेठानी से कहा कि मैं तुम्हारा दुःख जानता हूं. तुम शनि प्रदोष व्रत करो, इससे तुम्हें संतान सुख प्राप्त होगा. साधु ने सेठ-सेठानी प्रदोष व्रत की विधि भी बताई और शंकर भगवान की निम्न वंदना बताई.

हे रुद्रदेव शिव नमस्कार .
शिवशंकर जगगुरु नमस्कार ॥
हे नीलकंठ सुर नमस्कार .
शशि मौलि चन्द्र सुख नमस्कार ॥
हे उमाकांत सुधि नमस्कार .
उग्रत्व रूप मन नमस्कार ॥
ईशान ईश प्रभु नमस्कार .
विश्‍वेश्वर प्रभु शिव नमस्कार ॥

दोनों साधु से आशीर्वाद लेकर तीर्थयात्रा के लिए आगे चल पड़े. तीर्थयात्रा से लौटने के बाद सेठ और सेठानी ने मिलकर शनि प्रदोष व्रत किया जिसके प्रभाव से उनके घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ और खुशियों से उनका जीवन भर गया.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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शनि प्रदोष व्रत कथा, यहां पढ़ने व सुनने मात्र से हर कष्ट होंगे दूर

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