Ramadan 2025 Rules: पीरियड्स में मुस्लिम महिलाएं रोजा रख सकती हैं या नहीं, जानें क्या कहते हैं इस्लामिक नियम

Ramadan 2025 Rules: पीरियड्स में मुस्लिम महिलाएं रोजा रख सकती हैं या नहीं, जानें क्या कहते हैं इस्लामिक नियम

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Ramadan 2025: चांद दिखने के साथ ही रमजान के पाक माह की शुरुआत हो चुकी है. इस पूरे माह रोजा रखना, खुदा की इबादत करना, पांच वक्त की नमाज अदा करना, दीन दुखियों की मदद करना आदि कार्य शामिल होते हैं. पूरे माह रोजा र…और पढ़ें

पीरियड्स में मुस्लिम महिलाएं रोजा रख सकती हैं या नहीं

हाइलाइट्स

  • पीरियड्स में मुस्लिम महिलाएं रोजा नहीं रख सकतीं.
  • पीरियड्स खत्म होने पर छूटे रोजे पूरे करना अनिवार्य है.
  • रोजा रखने से पहले फज्र का इरादा जरूरी है.

रमजान के पाक महीने की शुरुआत हो गई है और अगले 30 दिन तक रोजा रखते हैं. रोजा सूरज निकलने के बाद लेकर डूबने तक किया जाता है, जिसके बाद कुछ भी खा पी सकते हैं, जिसे सहरी कहा जाता है. रमजान के दौरान पांच वक्त की नमाज अदा करने के साथ दीन दुखियों की मदद भी की जाती है. इस्लाम में रोजे रखने के कुछ विशेष नियम हैं, हालांकि कुछ खास लोगों को रोजा रखने से छूट मिली हुई है. वहीं रोजा अगर रख रहे हैं तो कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है, नहीं तो रोजा टूट जाता है. ऐसे में ही आज पीरियड्स को लेकर एक सवाल आया था, जिसमें कहा गया है कि मुस्लिम महिलाएं पीरियड्स के दौरान रोजा रख सकती है या नहीं. आइए इस सवाल का जवाब इस्लामिक नियमों के आधार पर जानते हैं…

जानें क्या कहते हैं नियम
पीरियड्स वाली महिला का रोजा रखना सही नहीं है और ना ही उसके लिए रोजा रखना जायज है. जब महिला को लगे कि उसके पीरियड्स आने वाले हैं तो वह रोजा रखना बंद कर सकती हैं और जब उसकी यह अवधि खत्म हो जाए तो उन दिनों के स्थान पर रोजा रखना अनिवार्य है, जिन दिनों का महिला ने रोजा नहीं रखा. अगर वह ऐसा नहीं करती हैं तो इसे गुनाह माना जाता है. वहीं अगर पीरियड्स खत्म हो जाने के बाद पीरियड्स दोबारा शुरू हो जाते हैं तो उन पर वही नियम लागू होगा.

रोजा रखने से पहले फज्र जरूरी
रोजा रखने से एक रात पहले यानी फज्र से पहले जिसने रोजे का इरादा नहीं किया है तो उसका रोजा नहीं माना जाता है. अगर महिला अगले दिन रोजा रखने का इरादा करती है और अगर वह कहती है कि अगर पीरियड्स आ गया तो मैं राज तोड़ दूंगी तो इससे कोई आपत्ति नहीं है और यह नीयच को लंबीत करने का तहत नहीं आता है बल्कि उसके रोजे की नीयत मजबूत है. अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर उल्टी कर देता है तो उसका रोजा टूट जाता है. वहीं जिनकी वाकई में तबीयत खराब है तो रोजा रखते समय उल्टी आ जाए तो उल्टी होने पर उनका रोजा नहीं टूटता. इसके लिए वह अन्य दिनों में रोजे की संख्या पूरी कर सकता है.

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