Padmini Ekadashi 2026: सर्वार्थ सिद्धि योग में आज अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें महत्व,
Padmini Ekadashi 2026 Today: आज पुरुषोत्तम मास की पद्मिनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है, इस एकादशी को कमला एकादशी और पुरुषोत्तम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. पुरुषोत्तम मास की वजह से तीन साल बाद इस एकादशी का व्रत किया जा रहा है और 27 साल बाद ज्येष्ठ मास में पद्मिनी एकादशी का संयोग बन रहा है. आज अधिकमास की पद्मिनी एकादशी पर सभी कार्य सिद्ध करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बन रहा है, जिससे आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं. आइए जानते हैं पद्मिनी एकादशी का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र…
पद्मिनी एकादशी का महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पद्मिनी एकादशी अधिकमास के शुक्ल पक्ष में आती है और यह भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी को समर्पित होती है. कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को सुख-समृद्धि, धन, यश और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है. साथ ही व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है. धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक पद्मिनी एकादशी का व्रत करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. विशेष रूप से अधिकमास में किए गए जप, तप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है.
पद्मिनी एकादशी 2026 आज
एकादशी तिथि की शुरुआत – सुबह 5 बजकर 10 मिनट से
एकादशी तिथि का समापन – सुबह 6 बजकर 11 मिनट तक
उदिया तिथि को मानते हुए पुरुषोत्तम मास की पद्मिनी एकादशी का व्रत आज किया जा रहा है.
पद्मिनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त व योग
ब्रह्म मुहूर्त: 04:03 ए एम से 04:44 ए एम
विजय मुहूर्त: 02:36 पी एम से 03:31 पी एम
गोधूलि मुहूर्त: 07:10 पी एम से 07:31 पी एम
निशिता मुहूर्त: 11:58 पी एम से 12:39 ए एम, 28 मई
सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:25 ए एम से 05:56 ए एम
रवि योग: 05:25 ए एम से 05:56 ए एम
पद्मिनी एकादशी पूजा विधि 2026
पद्मिनी एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर दीपक जलाएं. भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, पंचामृत और फल अर्पित करें. पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम और एकादशी व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है. इसके बाद देसी घी से भगवान नारायण की आरती उतारें. श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं और रात में भजन-कीर्तन करते हैं. शाम के समय फिर से आरती करें. अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाता है.
पद्मिनी एकादशी मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
ॐ विष्णवे नमः
शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम्॥
विष्णु जी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे , स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे।
ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी,
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी,
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी,
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी,
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता,
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता।
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति।
ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे,
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे।
ॐ जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा,
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा।
ॐ जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे।
ॐ जय जगदीश हरे।
भगवान विष्णु की जय, माता लक्ष्मी की जय…


