Makar Sankranti 2026 Til Daan: मकर संक्रांति पर क्यों करते हैं काले तिल-गुड़ का दान? एक काम से होगा 5 समस्याओं का निदान

Makar Sankranti 2026 Til Daan: मकर संक्रांति पर क्यों करते हैं काले तिल-गुड़ का दान? एक काम से होगा 5 समस्याओं का निदान

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Makar Sankranti 2026 Til Daan: मकर संक्रांति पर्व पर स्नान के बाद सूर्य देव की पूजा की जाती है. सूर्य देव को काला तिल अर्पित करते हैं. काला तिल और गुड़ का दान देते हैं. ऐसा करने से लोगों को 5 तरह के लाभ होते हैं या कहें तो 5 प्रकार की समस्याओं से ​छुटकारा मिलता है. आइए जानते हैं मकर संक्रांति पर काले तिल और गुड़ दान का कारण और महत्व.

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मकर संक्रांति पर सूर्य देव को काला तिल अर्पित करते हैं.
Makar Sankranti 2026 Til Daan: मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी दिन गुरुवार को है. इस दिन लोग प​वित्र नदियों में स्नान करते हैं, फिर सूर्य देव की पूजा करते हैं, उसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान दक्षिणा देते हैं. मकर संक्रांति के दिन काले तिल और गुड़ का दान करने की परंपरा है. सूर्य देव को भी काला तिल अर्पित करते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों किया जाता है? इन दोनों का संबंध सूर्य देव और शनि देव से है. जो लोग मकर संक्रांति के दिन काले तिल और गुड़ का दान करते हैं, उन लोगों की 5 समस्याओं का निदान हो जाता है. आइए जानते हैं मकर संक्रांति पर काले तिल और गुड़ दान का कारण और महत्व.

मकर संक्रांति पर काले तिल-गुड़ दान के फायदे

  • काले तिल का संबंध श​निदेव से है. जो लोग मकर संक्रांति पर काला तिल दान करते हैं, उन पर शनि और सूर्य दोनों की कृपा प्राप्त होती है.
  • इससे शनि की साढ़ेसाती में लाभ मिलता है. उससे जुड़े कष्ट मिटते हैं.
  • ऐसे ही जिन लोगों को पर ढैय्या का प्रभाव है, उनको भी लाभ मिलता है.
  • काले तिल का दान करने से कुंडली का शनि दोष दूर होता है.
  • गुड़ का संबंध सूर्य से है. जब आप मकर संक्रांति पर गुड़ का दान करते हैं तो कुंडली का सूर्य मजबूत होता है. सूर्य से जुड़े दोष दूर होते हैं.
  • मकर संक्रांति पर तिल दान करने से घर धन और धान्य से भर जाता है. जीवन में सुख और समृद्धि आती है. दरिद्रता दूर होती है.

मकर संक्रांति पर काले तिल की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य देव की पत्नी छाया गर्भ से थीं, उनके पेट में शनिदेव थे. जब शनिदेव का जन्म हुआ तो वे श्याम वर्ण के और काफी कमजोर थे. इसे देखकर सूर्य देव क्रोधित हो गए. उनके मन में छाया के चरित्र पर संदेह होने लगा. इस बात का जानकर छाया क्रोधित हो गईं और सूर्य देव को कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया. छाया अपने पुत्र शनि के साथ कुंभ राशि में रहने लगीं.

पत्नी के इस व्यवहार से नाराज सूर्य देव ने उनके घर को जला दिया. लेकिन उनके अन्य पुत्र यमराज को यह बात ठीक नहीं लगी. उन्होंने अपने तप से पिता को कुष्ठ रोग से मुक्ति दिलाई और उन्हें छाया-शनिदेव के पास जाने का अनुरोध किया. सूर्य देव जब कुंभ में गए तो देखा कि छाया और शनि का घर पूरी तरह से जल गया है. उस दौरान शनिदेव ने अपने पिता सूर्य देव का स्वागत काले तिल से किया क्योंकि और कुछ था नहीं. इससे सूर्य देव प्रसन्न हुए.

उन्होंने शनिदेव और छाया को रहने के लिए मकर नामक घर प्रदान किया. इस तरह से शनिदेव दो राशियों कुंभ और मकर के स्वामी बन गए. सूर्य देव ने शनिदेव को आशीर्वाद दिया कि जब वे मकर राशि में गोचर करेंगे तो उनका घर धन और धान्य से परिपूर्ण हो जाएगा. ऐसे ही जो भी व्यक्ति मकर सं​क्रांति पर सूर्य देव को काला तिल चढ़ाएगा, उसका घर भी धन, धान्य, सुख और समृद्धि से भर जाएगा.

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कार्तिकेय तिवारी

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 12 वर्षों का अनुभव है. डिजिटल पत्रक…और पढ़ें

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मकर संक्रांति पर क्यों करते हैं काले तिल-गुड़ दान? एक काम से 5 लाभ

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