Jitiya Vrat 2025 Puja Vidhi: 5 शुभ संयोग में जितिया आज, संतान के लिए रखें निर्जला व्रत, जानें पूजा विधि, मुहूर्त और नियम

Jitiya Vrat 2025 Puja Vidhi: 5 शुभ संयोग में जितिया आज, संतान के लिए रखें निर्जला व्रत, जानें पूजा विधि, मुहूर्त और नियम

Jitiya Vrat 2025 Puja Vidhi: जितिया व्रत आज 14 सितंबर रविवार को है. आज के दिन 5 शुभ संयोग बन रहे हैं. माताएं अपनी संतान की सुरक्षित, सुखी और उत्तम जीवन के लिए निर्जला व्रत हैं. सूर्योदय के साथ ही जितिया व्रत शुरू होता है और अगले दिन के सूर्योदय के बाद पारण तक चलता है. जितिया व्रत पुत्र की सुरक्षा के लिए करते हैं और बदलते समय के साथ माताएं पुत्री और पुत्री दोनों के लिए रखने लगी हैं, जो प्रशंसनीय है. जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत कहते हैं क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में मृत​ शिशु को दोबारा जीवित कर ​दिया था. उस शिशु को अश्वत्थामा ने मारा था. उसे शिशु का नाम जीवित्पुत्रिका पड़ा, जो आगे राजा परीक्षित के नाम से लोकप्रिय हुआ. इस व्रत की पूजा में जितिया व्रत कथा जरूर सुनते हैं, इसके बिना यह व्रत पूर्ण नहीं होता है. महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान ट्रस्ट के ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय बता रहे हैं जितिया की पूजा विधि, मुहूर्त और नियम के बारे में.

जितिया व्रत पर 5 शुभ संयोग

1. इस साल की जितिया पर महालक्ष्मी व्रत का समापन हो रहा है.

2. आज के दिन मासिक कालाष्टमी व्रत भी है.

3. आज रवि योग सुबह 06:05 ए एम से 08:41 ए एम तक है.

4. सिद्धि योग सुबह 07:35 ए एम से कल 04:55 ए एम तक है.

5. आज रोहिणी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 08:41 ए एम तक है, उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र है.

जितिया का शुभ मुहूर्त और पारण समय

आश्विन कृष्ण अष्टमी ति​थि का शुभारंभ: आज, रविवार, 5:04 एएम पर
आश्विन कृष्ण अष्टमी ति​थि का समापन: कल, सोमवार, 3:06 एएम पर
जितिया सुबह पूजा मुहूर्त: 7:38 ए एम से दोपहर 12:16 पी एम तक
जितिया संध्या पूजा मुहूर्त: 6:27 पी एम से 07:55 पी एम तक
जितिया पारण समय: कल, सोमवार, 06:06 ए एम के बाद

जितिया व्रत की विधि

माताएं संतान की सुरक्षा के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इसमें अन्न, जल, फल, दूध आदि का सेवन वर्जित है. इसमें व्रती को ब्रह्मचर्य के नियमों का कड़ाई से पालन करना होता है. इस व्रत में कुश से गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन की मूर्ति बनाते हैं. कई क्षेत्रों में मादा सियार और मादा चील की मूर्ति की पूजा करते हैं.

जितिया पूजा विधि

1. शुभ मुहूर्त में एक बर्तन को पानी से भर लें. उसमें जीमूतवाहन की मूर्ति की स्थापना करें.

2. उसके बाद जीमूतवाहन की पूजा अक्षत्, फूल, माला, धूप, दीप आदि से करें.

3. फिर जीमूतवाहन को खल्ली, सरसों के तेल, बांस के पत्ते आदि अर्पित करें. उसके बाद लाल-पीले रंग वाली रूई अर्पित करें.

4. अब व्रती को मिट्टी और गोबर से मादा चील और सियार की मूर्ति बनानी चाहिए.

5. उस मूर्ति पर सिंदूर, केराव, खीरा, दही, चूड़ा आदि चढ़ाएं. उनके ललाट पर लाल सिंदूर से टीका करें.

6. फिर माताएं जितिया व्रत कथा या जीवित्पुत्रिका व्रत कथा सुनें. पूजा के समापन के समय संतान के सुखी जीवन की प्रार्थना करें.

जितिया पारण की विधि

कल यानि 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद जितिया का पारण करें. पारण में व्रती को रागी की रोटी, तोरई और नोनी साग की सब्जी खानी चाहिए.

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