Death or Life :ओशो की कथा जिसमें लकड़हारा मृत्यु की कामना करता है,लेकिन यमदूत आने पर जीवन की महत्ता समझ में आती है
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Death Or Life : ओशो ने एक सूफी कथा सुनाई जिसमें एक बूढ़ा लकड़हारा मृत्यु की कामना करता है, लेकिन जब यमदूत सामने आते हैं, तो वह डर जाता है और अपनी लकड़ी का गट्ठर उठाने की मदद मांगता है. जीवन की महत्ता समझाता है.
मृत्यु के क्षण में जीवन की महत्ता का एहसास होता है
हाइलाइट्स
- ओशो ने सूफी कथा से जीवन की महत्ता समझाई.
- लकड़हारा मृत्यु की कामना करता है, पर यमदूत से डर जाता है.
- मृत्यु के क्षण में जीवन की महत्ता का एहसास होता है.
Death Or Life : उम्र के पड़ाव पर प्रत्येक व्यक्ति लगभग चाहता है कि उसकी मृत्यु हो जाये. हर व्यक्ति अपनी आसान मृत्यु चाहता है. अक्सर लोग कहते हैं कि मेरी मृत्यु कब आएगी. जीवन से परेशान होने वाले लोग भी मृत्यु के लिये पुकारते हैं. पर असल जिंदगी में जीवन जीना भी किसी मृत्यु से कम नहीं है.छोटी छोटी बातों और कामों का संघर्ष.अक्सर पेट पालने के लिये घर से बाहर खतरे में रहकर काम करना भी मृत्यु से कम नहीं.मृत्यु चाहने वालों के लिये आचार्य रजनीश ओशो ने एक कहानी सुनाई जिससे हमें एहसास होगा कि जीवन कितना जरुरी है.
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यह एक सूफी कथा है : एक लकड़हारा सत्तर साल का हो गया है, लकड़ियां ढोते-ढोते जिंदगी बीत गयी. कई बार सोचा कि मर क्यों न जाऊं! कई बार परमात्मा से प्रार्थना की कि हे प्रभु, मेरी मौत क्यों नहीं भेज देता. सार क्या है ? इस जीवन में रोज लकड़ी कांटना, रोज लकड़ी बेचना, थक गया हूं! किसी तरह रोजी-रोटी जुटा पाता हूं. फिर भी पूरा पेट नहीं भरता. एक जून मिल जाए तो बहुत. कभी-कभी दोनों जून भी उपवास हो जाता है. कभी वर्षा ज्यादा दिन हो जाती है. लकड़ी नहीं कांटने जा पाता. फिर का भी हो गया हूं कभी बीमार हो जाता हूं. लकड़ी कांटने से मिलता कितना है! एक दिन लौटता था थका-मादा, खांसता-खंखारता, अपने गट्ठर को लिये. और बीच में एकदम ऐसा उसे लगा कि अब बिलकुल व्यर्थ है मेरा जीवन. यह अब मैं क्यों ढो रहा हूं! उसने गट्ठर नीचे पटक दिया, आकाश की तरफ हाथ जोड़कर कहा कि मृत्यु, तू सब को आती है और मुझे नहीं आती! हे यमदूत, तुम मुझे क्या भूल ही गये हो, उठा लो अब! संयोग की बात, ऐसा अक्सर तो होता नहीं, उस दिन हो गया, यमदूत पास से ही गुजर रहे थे. किसी को लेने जा रहे होंगे. सोचा कि बड़े हृदय से कातर होकर पुकार रहा है, तो यमदूत आ गये. उन्होंने उसके कंधे पर हाथ रखा और बोले क्या भाई, क्या काम है? उस बूढ़े ने ज्यों ही देखा, मौत सामने खड़ी है, प्राण कंप गये! कई दफे जिंदगी में बुलायी थी मौत. जब तक आए न, बुलाने का एक मजा है. अब मौत सामने खड़ी थी तो प्राण कप गये, भूल ही गया मरने इत्यादि की बातें. बोला कुछ नहीं, कुछ नहीं मेरा गट्ठर नीचे गिर गया है. यहां कोई उठाने वाला न दिखा इसलिए आपको बुलाया. जरा उठा दें और नमस्कार. और कोई जरूरत नहीं है! ऐसे तो हम जिंदगीभर कहते रहे, मुझे मरना नहीं है. यह सिर्फ गट्ठर मेरा उठाकर मेरे सिर पर रख दें. जिस गट्ठर से परेशान था. उसी को यमदूत से उठवाकर सिर पर रख लिया. उस दिन उस के की पुलक देखते जब वह घर की तरफ आया! जवान हो गया था फिर से, बड़ा प्रसन्न था. बच गये मौत से. मौत के क्षण में जीवेषणा प्रगाढ़ हो जाती है. ओशो
February 27, 2025, 16:33 IST
Death or Life : मृत्यु की चाह और जीवन का महत्व,ओशो की कहानी


