Chandra Grahan 2025: होली पर चंद्र ग्रहण का साया! आसमान में दिखेगा 'ब्लड मून', जानें कब और कैसे बनता है लाल चांद?

Chandra Grahan 2025: होली पर चंद्र ग्रहण का साया! आसमान में दिखेगा 'ब्लड मून', जानें कब और कैसे बनता है लाल चांद?

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Chandra Grahan 2025: 14 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. ये घटना उन देशों में देखने को मिलेगी जहां रात का समय होगा. यह घटना हमें यह समझने का मौका देती है कि आकाश में होने वाली घटनाएं कितनी अद्भु…और पढ़ें

होली पर अद्भुत होगा आसमान का नजारा!

हाइलाइट्स

  • 14 मार्च 2025 को पूर्ण चंद्रग्रहण लगेगा.
  • भारत में यह चंद्रग्रहण दिखाई नहीं देगा.
  • ब्लड मून विशेष रूप से अन्य देशों में दिखेगा.

Chandra Grahan 2025: इस वर्ष होली के पर्व के साथ ही एक खगोलीय घटना होने जा रही है. 14 मार्च 2025 को होली के दिन साल का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण लगेगा, जो कि एक ब्लड मून (लाल चांद) के रूप में दिखाई देगा. यह घटना एक दुर्लभ खगोलीय संयोग है, जिसमें चंद्रमा का रंग लाल हो जाता है. इस आर्टिकल में हम जानेंगे भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से इस चंद्रग्रहण और ब्लड मून के बारे में विस्तार से, जिससे हम समझ सकेंगे कि यह घटना कैसे होती है और इसका प्रभाव क्या होता है.

चंद्र ग्रहण क्या होता है?
चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं. इस स्थिति में सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती, क्योंकि पृथ्वी अपनी छाया से चंद्रमा को ढक देती है. जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाता है, तो इसे पूर्ण चंद्रग्रहण कहते हैं. जब चंद्रमा आंशिक रूप से ढकता है, तो उसे आंशिक चंद्रग्रहण कहते हैं.

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ब्लड मून कैसे बनता है?
ब्लड मून उस स्थिति को कहा जाता है जब चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग लाल हो जाता है. यह तब होता है जब पृथ्वी की छाया सूर्य की रोशनी को रोक देती है, लेकिन वातावरण में मौजूद धूल, गैस और अन्य कणों के कारण लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं, जिससे चंद्रमा लाल दिखाई देता है. इस घटना को ‘रैले स्कैटरिंग’ प्रभाव कहा जाता है. जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरती है, तो नीली किरणें बिखर जाती हैं और लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं, जिससे वह लाल या नारंगी रंग में दिखाई देता है.

ब्लड मून एक दुर्लभ घटना है, जो सामान्यत: साल में एक या दो बार ही होती है. यह घटना उस समय होती है जब पूर्ण चंद्रग्रहण होता है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर ठीक से पड़ती है.

14 मार्च 2025 का पूर्ण चंद्रग्रहण
14 मार्च 2025 को पहला पूर्ण चंद्रग्रहण लगेगा, जो भारत में दिखाई नहीं देगा. यह चंद्रग्रहण प्रातः 9 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 29 मिनट तक चलेगा. चूंकि इस समय भारत में दिन का समय रहेगा, इसलिए यहां लोग इस खगोलीय नजारे का अनुभव नहीं कर पाएंगे. हालांकि, यह ग्रहण अन्य देशों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा.

इस चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग लाल हो जाएगा, जिसे ब्लड मून कहा जाएगा. यह खगोलीय घटना विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, पूर्वी एशिया और अंटार्कटिका में दिखाई देगी.

क्यों भारत में नहीं दिखाई देगा चंद्रग्रहण?
यह चंद्रग्रहण दिन के समय होगा, जब भारत में सूरज की रोशनी अधिक होगी. सूरज की रोशनी चंद्रमा को ढक लेती है, जिससे यह खगोलीय घटना भारत में दिखाई नहीं देगी. चंद्रग्रहण को तब ही देखा जा सकता है जब चंद्रमा रात के समय आकाश में हो और सूरज की रोशनी कम हो. इसलिए भारत में इस चंद्रग्रहण का कोई प्रभाव नहीं होगा.

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ब्लड मून का ज्योतिषीय दृष्टिकोण
ज्योतिष के अनुसार, ब्लड मून को एक विशेष खगोलीय घटना माना जाता है, जो जीवन में कुछ बदलावों और संकटों का संकेत देती है. कुछ लोग इसे शुभ मानते हैं, जबकि अन्य इसे अशुभ मानते हैं. हालांकि, इस पर कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और यह ज्यादातर विश्वासों और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है.

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होली पर चंद्र ग्रहण का साया! आसमान में दिखेगा ‘ब्लड मून’, कब, कैसे बनता है?

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