सच्चा सुख क्या है? बागेश्वरधाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिया बेबाक जवाब, पढ़ें और बताएं आप कितने सुखी
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Pandit Dhirendra Sharstri: आजकल पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की लोकप्रियता विदेशों तक फैली है. वे छतरपुर में बालाजी हनुमान मंदिर के पास ‘दिव्य दरबार’ लगाते हैं. यहां दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं और जीवन से जुड़ी…और पढ़ें
सच्चा सुख क्या है? सुनिए क्या है पंडित धीरेंद्र शास्त्री का जबाव.
हाइलाइट्स
- सच्चा सुख क्या है? पर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने दिया जबाव.
- पंडित धीरेंद्र शास्त्री मध्य प्रदेश के छतरपुर में ‘दिव्य दरबार’ लगाते हैं.
- धीरेंद्र शास्त्री के दादाजी ने उन्हें भागवत गीता और दरबार लगाना सिखाया.
Pandit Dhirendra Sharstri: भारत में सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहने वाले साधु-संतों में बागेश्वरधाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी एक हैं. वह मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के गांव गढ़ा के रहने वाले हैं. आजकल उनकी लोकप्रियता विदेशों तक फैली है. धीरेंद्र शास्त्री छतरपुर में ही बालाजी हनुमान मंदिर के पास ‘दिव्य दरबार’ लगाते हैं. इस स्थान को बागेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है. उनके दिव्य दरबार में दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. इस दौरान लोग तमाम तरह के सवाल करते हैं. जिनका धीरेंद्र शास्त्री बेबाकी से जबाव देते हैं. एक बार उनसे पूछा गया कि सच्चा सुख क्या है? आइए जानते हैं इसपर क्या कहते हैं पंडित धीरेंद्र शास्त्री-
विदेशों तक में फैली लोकप्रियता
पंडित धीरेंद्र शास्त्री रामकथा के साथ-साथ दिव्य दरबार लगाते हैं. उनके दिव्य दरबार के चलते ही सबसे पहले उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से वे लोकप्रिय मिली और अब वे देश और विदेश में दूर-दूर तक कथा के साथ ही दरबार लगाने जाते हैं. वे चमत्कारिक रूप से लोगों के दु:ख दर्द दूर करने का दावा करते हैं.
सच्चा सुख क्या होता है?
जब बागेश्वरधाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से पूछा गया कि सच्चा सुख क्या है? इस पर धीरेंद्र शास्त्री कहते हैं कि, “जो प्राप्त है वही पर्याप्त है. जो मिला है वो कम नहीं है और जो नहीं मिला है उसका कोई गम नहीं है. जो मिलेगा वो सिर्फ एक ख्वाब है और जो मिला है वही लाजवाब है”. उनका कहना है कि, इंसान को अपना दायरा सीमित कर लेना चाहिए. उसके पास जितना है उतने में ही खुश रहें.
दादाजी ने सिखाया भागवत गीता अध्ययन करना
धीरेंद्र शास्त्री बताते हैं कि, उनके दादाजी एक सिद्ध संत थे, जिनका नाम भगवानदास गर्ग था. वह निर्मोही अखाड़े से जुड़े हुए थे. वे भी दरबार लगाते थे. पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अपने दादाजी को ही अपना गुरु मानते थे. उन्होंने ही उन्हें रामायण और भागवत गीता का अध्ययन करना सिखाया था. पंडित धीरेन्द्र कृष्ण गर्ग अपने दादाजी भगवानदास गर्ग को ही अपना गुरु मानते थे.
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February 19, 2025, 12:51 IST
सच्चा सुख क्या है? देखें बागेश्वरधाम के धीरेंद्र शास्त्री ने क्या दिया जवाब


