श्रीरामचरितमानस की इन चौपाइयों का करें पाठ, विपत्ति, क्लेश, विघ्न, चिंता, अकाल मृत्यु से पाएं मुक्ति!

श्रीरामचरितमानस की इन चौपाइयों का करें पाठ, विपत्ति, क्लेश, विघ्न, चिंता, अकाल मृत्यु से पाएं मुक्ति!

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Shri Ramcharitmanas: श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां संकटनाशक हैं. तुलसीदास रचित ये चौपाइयां विपत्ति, क्लेश, विघ्न, खेद, चिंता, रोग, मस्तिष्क पीड़ा, विष और अकाल मृत्यु से बचाव करती हैं. इनका नियमित पाठ जीवन के हर स…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां संकट नाशक हैं.
  • चौपाइयों का पाठ जीवन के संकट दूर करता है.
  • तुलसीदास रचित चौपाइयां विपत्ति, क्लेश, विघ्न हरती हैं.

Shri Ramcharitmanas: सनातन सभ्यता में श्रीरामचरितमानस सर्वोच्च ग्रंथ माना जाता है. इसका हमारे जीवन में सबसे ऊंचा स्थान है. श्रीरामचरितमानस में अलग-अलग चौपाइयों का अलग-अलग महत्व होता है. यदि हम रामायण में वर्ण चौपाइयों को अपनी समस्याओं के आधार पर पाठ करना शुरू करते हैं तो हमारे जीवन से समस्याओं का अंत हो जाता है. महाकवि तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां मात्र राम का गुणगान ही नहीं करती बल्कि इ‍तनी चमत्कारिक भी हैं कि जीवन के हर संकट को समाप्त करने की दिव्य शक्ति उनमें विद्यमान है. प्रभु श्री राम के पावन आशीर्वाद हर चौपाई में निहित हैं. पढ़ें श्री रामचरितमानस की शुभ चौपाई और उनके जप से दूर होने वाले संकट.

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हर समस्या का होगा समाधान : श्रीरामचरितमानस में अनेकों चौपाइयों का संग्रह है. इन चौपाइयों का बहुत ही जादुई असर हमारे जीवन पर होता है. यदि हम इन चौपाइयों को दैनिक जीवन में रोज पाठ करना शुरू कर दें. इन चौपाइयों का अपनी समस्या के आधार पर चयन करके हम अपने जीवन में संकटों से मुक्ति पा सकते हैं.इन चौपाइयों का एक एक शब्द अमृत है.

1. विपत्ति-नाश के लिए :
‘राजीव नयन धरें धनु सायक. भगत बिपति भंजन सुखदायक..’

2. संकट-नाश के लिए :

‘जौं प्रभु दीन दयालु कहावा. आरति हरन बेद जसु गावा..
जपहिं नामु जन आरत भारी. मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी..
दीन दयाल बिरिदु संभारी. हरहु नाथ मम संकट भारी..’

3. कठिन क्लेश नाश के लिए :

‘हरन कठिन कलि कलुष कलेसू. महामोह निसि दलन दिनेसू’

4. विघ्न शांति के लिए :

‘सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही. राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥’

5. खेद नाश के लिए :

‘जब तें राम ब्याहि घर आए. नित नव मंगल मोद बधाए॥’

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6. चिंता की समाप्ति के लिए :

‘जय रघुवंश बनज बन भानू. गहन दनुज कुल दहन कृशानू॥’

8. रोग तथा उपद्रवों की शांति के लिए :

‘दैहिक दैविक भौतिक तापा. राम राज काहूहिं नहि ब्यापा॥’

9. मस्तिष्क की पीड़ा दूर करने के लिये :

‘हनुमान अंगद रन गाजे. हांक सुनत रजनीचर भाजे..’

10. विष नाश के लिए :

‘नाम प्रभाउ जान सिव नीको. कालकूट फलु दीन्ह अमी को..’

11. अकाल मृत्यु से बचने के लिए :

‘नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट.
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट..’

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