हथेली में राहु, केतु और शनि पर्वत का क्या है महत्व? जानें ज्योतिषाचार्य की राय
फरीदाबाद: हाथ की रेखाएं देखकर भविष्य जानने की परंपरा सदियों पुरानी है. ज्यादातर लोग जीवन रेखा, भाग्य रेखा या विवाह रेखा के बारे में जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता होता है कि हथेली में राहु, केतु और शनि से जुड़े पर्वत भी माने जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन स्थानों की स्थिति व्यक्ति के स्वभाव, स्वास्थ्य, करियर और जीवन में आने वाली चुनौतियों का संकेत दे सकती है. हालांकि जानकार यह भी कहते हैं केवल रेखाओं के भरोसे भविष्य तय नहीं होता… बल्कि इंसान के कर्म सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं.
क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य
Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के ज्योतिषाचार्य पंडित उमाचंद मिश्रा बताते हैं हथेली में राहु, केतु और शनि के अलग-अलग स्थान माने गए हैं. इन पर्वतों का उभरा हुआ या दबा हुआ होना व्यक्ति के जीवन से जुड़े कई संकेत देता है. लेकिन इन संकेतों को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि समय के साथ हथेली की रेखाएं और पर्वतों की स्थिति में भी बदलाव आता रहता है.
केतु पर्वत देता है स्वास्थ्य से जुड़े संकेत
पंडित उमाचंद मिश्रा बताते हैं हथेली के किनारे, मणिबंध के पास का हिस्सा केतु पर्वत माना जाता है. यदि यह स्थान दबा हुआ दिखाई देता है तो व्यक्ति को बार-बार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं. घुटनों में दर्द, पैरों में तकलीफ, पेट से जुड़ी समस्याएं और अपच जैसी दिक्कतें बनी रह सकती हैं. ऐसे लोगों को अपने खान-पान और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
राहु पर्वत से जुड़ी होती हैं रुकावटें
ज्योतिषाचार्य पंडित उमाचंद मिश्रा बताते हैं हथेली के बीच का हिस्सा राहु पर्वत माना जाता है. यदि यह क्षेत्र कमजोर या दबा हुआ हो तो व्यक्ति के कामों में बार-बार देरी हो सकती है. मन भ्रमित रह सकता है, फैसले लेने में कठिनाई आ सकती है और कई बार मेहनत के बाद भी सफलता देर से मिलती है. इसके अलावा गुस्सा बढ़ना, मानसिक तनाव और छोटी-छोटी बातों पर परेशानी महसूस होना भी राहु के प्रभाव से जोड़ा जाता है.
शनि पर्वत का करियर से होता है संबंध
ज्योतिषाचार्य पंडित उमाचंद मिश्रा बताते हैं बीच वाली उंगली के नीचे का भाग शनि पर्वत माना जाता है. अगर यह स्थान दबा हुआ हो तो करियर में बार-बार रुकावट आ सकती है. मेहनत का पूरा फल मिलने में समय लगता है, सम्मान में कमी महसूस हो सकती है और व्यक्ति के अंदर आलस्य भी बढ़ सकता है. वहीं अगर शनि पर्वत उभरा हुआ और संतुलित हो तो इसे शुभ माना जाता है. ऐसे लोगों को करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, समाज में सम्मान बढ़ता है और सरकारी कार्यों में भी लाभ मिलने की संभावना रहती है.
रेखाओं से ज्यादा जरूरी हैं आपके कर्म
पंडित उमाचंद मिश्रा बताते हैं हथेली की रेखाएं और पर्वत समय के साथ बदलते रहते हैं. इसलिए इन्हें जीवन का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता. रामचरितमानस में एक चौपाई है गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई…कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा… इसका मतलब है इंसान का भाग्य उसके कर्मों से बनता है. अगर किसी की रेखाएं सामान्य हों लेकिन उसके कर्म अच्छे हों तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं. वहीं अच्छी रेखाएं भी तब तक लाभ नहीं देतीं, जब तक व्यक्ति सही कर्म नहीं करता. इसलिए ज्योतिषीय संकेतों को मार्गदर्शन के रूप में देखें और अपने कर्मों पर सबसे ज्यादा ध्यान दें.


