मॉडर्न साइंस से पूर्व तुलसीदास ने बताई थी पृथ्वी से सूर्य की दूरी, हनुमान चालीसा में जवाब

मॉडर्न साइंस से पूर्व तुलसीदास ने बताई थी पृथ्वी से सूर्य की दूरी, हनुमान चालीसा में जवाब

Earth Sun Distance In Hanuman Chalisa: पृथ्वी से सूर्य के बीच की दूरी कितनी है? इस सवाल का जवाब आप 2 सेकेंड में गूगल करके जान सकते हैं क्योंकि मॉडर्न साइंस ने खगोलीय गणना को आसान बनाया है. लेकिन कल्पना करिए कि आपके पास मॉडर्न साइंस की सुविधा नहीं है, ऐसे में इस सवाल का जवाब कितना कठिन या असंभव जैसा होगा. आपको जानकर हैरानी होगी कि जब मॉडर्न साइंस नहीं था, तो उस समय में रामचरितमानस के रचयिता तुलसीदास जी ने इस सवाल का जवाब बता दिया था. जो लोग हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, वे रोज एक चौपाई में इस प्रश्न का उत्तर देते हैं. जो है- युग सहस्त्र योजन पर भानु, लील्यो तिनि मधुर फल जानू.

16वीं शताब्दी में हनुमान चालीसा की रचना

गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की रचना 16वीं शताब्दी में की थी. उसमें हनुमान जी के बाल्यकाल की घटना का वर्णन करते हुए लिखा है- युग सहस्त्र योजन पर भानु, लील्यो तिनि मधुर फल जानू. इसका अर्थ है कि हनुमान जी ने हजारों योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को लाल फल समझकर निगल लिया. इस चौपाई में तुलसीदास जी ने पृथ्वी से सूर्य की दूरी बताई थी.

तुलसीदास जी ने बताई 15.36 करोड़ किलोमीटर सूर्य की दूरी

युग सहस्त्र योजन पर भानु यानि एक युग एक हजार योजन पर सूर्य. वैदिक काल गणना के अनुसार, एक युग का समय 12000 वर्ष का माना जाता है, सहस्त्र का ​अर्थ 1000 हुआ. वहीं एक योजन में 8 मील या 9.6 किलोमीटर होता है. अब आप सभी का गुणा कर दें.

12000×1000×8= 9,60,00,000 मील. अब मील को किलोमीटर में बदल दें. 1 मील में 1.6 किलोमीटर होता है.

9,60,00,000×1.6= 15,36,00,000 किलोमीटर.

इस तरह से पृथ्वी से सूर्य की दूरी 15.36 करोड़ किलोमीटर हुई.

मॉडर्न साइंस ने बताई पृथ्वी से सूर्य की सही दूरी

20वीं शताब्दी में जब आधुनिक रडार, उपग्रह आदि ने खगोल विज्ञान को उन्नत बनाया तो उनकी मदद से पृथ्वी से सूर्य की सही दूरी के बारे में पता चला. पृथ्वी से सूर्य की दूरी लगभग 14.96 करोड़ किलोमीटर है.

धरती सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है, इसकी वजह से यह दूरी सालभर में घटती और बढ़ती रहती है. इस आधार पर पृथ्वी से सूर्य की न्यूनतम दूरी लगभग 14.7 करोड़ किमी है, वहीं अधिकतम दूरी लगभग 15.2 करोड़ किमी है.

इस तरह से देखा जाए तो तुलसीदास जी ने जो दूरी बताई थी, व​ह मॉडर्न साइंस की मदद से बताई गई दूरी के लगभग बराबर है.

सबसे पहले आरिस्तार्चस ने की थी कोशिश

लगभग 270 ईसा पूर्व में यूनान के खगोलविद आरिस्तार्चस ने धरती से सूर्य और चंद्रमा की दूरी मापने का प्रयास किया. लेकिन उस समय सही तकनीक और साधन के अभाव में वे गलत साबित हुए. हालांकि वे बताने में सफल रहे कि सूर्य धरती से काफी दूरी पर है.

उसके बाद 1672 में खगोल वैज्ञानिक जियोवान्नी कैसिनी और जीन रिचर ने सूर्य से पृथ्वी की दूरी का पता लगाने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि सूर्य पृथ्वी से लगभग 22,000 से 24,000 पृथ्वी की त्रिज्या की दूरी पर है.

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