मंदिर में परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए? किस देवता की कितनी परिक्रमा मानी जाती है शुभ

मंदिर में परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए? किस देवता की कितनी परिक्रमा मानी जाती है शुभ

Mandir Me Parikrama: मंदिर में प्रवेश करते ही ज्यादातर लोग भगवान के दर्शन करते हैं, हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं और फिर श्रद्धा से परिक्रमा भी करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए? कई लोग एक बार घूमकर लौट आते हैं, तो कुछ तीन, पांच या सात बार परिक्रमा करते हैं. दरअसल, सनातन परंपरा में परिक्रमा केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और आस्था का प्रतीक मानी जाती है. मान्यता है कि जब भक्त भगवान के चारों ओर घूमता है तो वह यह भाव प्रकट करता है कि उसके जीवन का केंद्र केवल ईश्वर हैं.

अलग-अलग देवी-देवताओं की परिक्रमा को लेकर भी अलग मान्यताएं प्रचलित हैं. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये नियम धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं, जिनका पालन श्रद्धा और अपनी सुविधा के अनुसार किया जाता है. आइए जानते हैं कि किस देवता की कितनी परिक्रमा शुभ मानी जाती है और इसके पीछे क्या धार्मिक महत्व बताया गया है.

भगवान की परिक्रमा का क्या होता है महत्व?
हिंदू धर्म में परिक्रमा का अर्थ है किसी पूजनीय स्थान, मंदिर, देव प्रतिमा या पवित्र वृक्ष के चारों ओर दक्षिणावर्त दिशा में घूमना. धार्मिक मान्यता है कि इससे व्यक्ति अपने मन, वचन और कर्म को ईश्वर के प्रति समर्पित करता है. परिक्रमा करते समय भक्त भगवान का स्मरण करता है, जिससे मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है.

शिव जी की परिक्रमा कैसे करनी चाहिए?

1. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती
भगवान शिव की पूजा में एक विशेष नियम बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा नहीं की जाती. जहां से जल निकासी होती है, जिसे सोमसूत्र कहा जाता है, वहां तक पहुंचकर वापस लौटना शुभ माना जाता है. इसे आधी परिक्रमा भी कहा जाता है. माना जाता है कि सोमसूत्र का सम्मान करना भगवान शिव की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

2. भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कितनी परिक्रमा करें?
भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और उनके स्वरूपों की सामान्य रूप से चार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है. कई मंदिरों में भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार एक या तीन परिक्रमा भी करते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह मानी जाती है कि परिक्रमा पूरी श्रद्धा और शांत मन से की जाए.

3. गणेश जी की परिक्रमा का नियम
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार उनकी तीन परिक्रमा करना शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि, विवेक व सफलता का आशीर्वाद मिलता है.

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4. मां दुर्गा और देवी मंदिर में कितनी परिक्रमा करें?
शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की एक परिक्रमा करने की परंपरा कई धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं में बताई गई है. नवरात्रि के दौरान भी भक्त श्रद्धा के साथ देवी की परिक्रमा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

5. सूर्य देव की परिक्रमा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव की सात परिक्रमा करना शुभ माना जाता है. सूर्य को ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन का आधार माना गया है. इसलिए रविवार या विशेष अवसरों पर कई श्रद्धालु सूर्य उपासना के साथ परिक्रमा भी करते हैं.

क्या एक परिक्रमा करना भी पर्याप्त है?
अगर किसी व्यक्ति के पास समय कम हो, स्वास्थ्य ठीक न हो या भीड़ अधिक हो, तो वह एक परिक्रमा भी कर सकता है. धर्मशास्त्रों में भाव और श्रद्धा को सबसे अधिक महत्व दिया गया है. केवल संख्या बढ़ाने से अधिक जरूरी है कि पूजा पूरे मन और विश्वास के साथ की जाए.

परिक्रमा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
परिक्रमा हमेशा दक्षिणावर्त दिशा में करनी चाहिए. इस दौरान जल्दबाजी या बातचीत से बचना बेहतर माना जाता है. भगवान का स्मरण करते हुए शांत मन से चलना शुभ माना जाता है. मंदिर के नियमों का पालन करना और वहां की व्यवस्था का सम्मान करना भी जरूरी है, अगर किसी मंदिर में परिक्रमा को लेकर विशेष परंपरा हो, तो उसी का पालन करना उचित माना जाता है.

आज के समय में लोग मंदिर तो नियमित जाते हैं, लेकिन कई बार पूजा-पद्धति की छोटी-छोटी बातों की जानकारी नहीं होती. ऐसे में धार्मिक परंपराओं को समझकर श्रद्धा के साथ उनका पालन करना आध्यात्मिक अनुभव को और बेहतर बना सकता है. हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और मंदिरों में परिक्रमा से जुड़े नियमों में थोड़ा अंतर भी देखने को मिलता है. इसलिए स्थानीय परंपरा और मंदिर के निर्देशों का सम्मान करना हमेशा उचित माना जाता है.

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