नहीं हो रही शादी? हल्दी की गांठ से कलावा तक…गुप्त नवरात्रि में आजमाएं ये 5 उपाय
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Gupt Navratri Remedies : इस वर्ष आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक रहेगी. जिन युवक-युवतियों के विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हों, रिश्ते तय होकर टूट जाते हों या कुंडली में बृहस्पति और शुक्र कमजोर हों, उनके लिए गुप्त नवरात्रि अंतिम उपाय है. अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम लोकल 18 से बताते हैं कि गुप्त नवरात्रि के दौरान कुछ धार्मिक उपाय विवाह के मार्ग में आने वाली रुकावटों को दूर करते हैं. अगर विवाह में अत्यधिक विलंब हो रहा हो तो दुर्गा सप्तशती के अर्गला स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिए. किसी सुहागन महिला अथवा देवी मंदिर में सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी, लाल चुनरी और दूसरी श्रृंगार सामग्रियों का दान करना भी शुभ माना गया है.
अयोध्या. सनातन धर्म में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि सार्वजनिक रूप से उत्सव के रूप में मनाई जाती है, गुप्त नवरात्रि साधना, मंत्र-जप और देवी उपासना के लिए अत्यंत फलदायी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए पूजन और उपाय व्यक्ति की मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायक हैं. अगर आपके विवाह में कोई बाधा उत्पन्न हो रही है तो गुप्त नवरात्रि में कुछ उपाय करने से बाधा हट जाती है. अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम लोकल 18 से बताते हैं कि वर्ष में कुल चार नवरात्रियां आती हैं, जिनमें दो गुप्त नवरात्रियां होती हैं.
इस वर्ष आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक रहेगी. यह नौ दिनों का समय विशेष रूप से देवी आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ माना जाता है. पंडित कल्कि राम बताते हैं कि जिन युवक-युवतियों के विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हों, रिश्ते तय होकर टूट जाते हों या कुंडली में बृहस्पति और शुक्र कमजोर हों, उनके लिए गुप्त नवरात्रि का समय विशेष लाभकारी है. इस दौरान कुछ धार्मिक उपाय विवाह के मार्ग में आने वाली रुकावटों को दूर करते हैं.
मांगलिक कार्यों का प्रतीक
पंडित कल्कि राम बताते हैं कि गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों तक प्रतिदिन शाम के समय मां कात्यायनी के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर “कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरी” मंत्र का कम से कम एक माला जप करना शुभ है. धार्मिक मान्यता है कि इससे शीघ्र विवाह के योग मजबूत होते हैं. विवाह योग्य युवक या युवती को भगवान शिव और माता पार्वती को प्रतिदिन हल्दी की गांठ अर्पित करनी चाहिए. हल्दी को मांगलिक कार्यों का प्रतीक माना जाता है. यह उपाय वैवाहिक सुख की कामना से किया जाता है.
राहु-केतु का अशुभ प्रभाव
यदि विवाह में अत्यधिक विलंब हो रहा हो तो दुर्गा सप्तशती के अर्गला स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करना भी लाभकारी है. “पत्नीं मनोरमां देहि” अथवा “रूपं देहि जयं देहि” जैसी प्रार्थनाओं के साथ किया गया पाठ सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है. गुप्त नवरात्रि की पंचमी या अष्टमी तिथि पर किसी सुहागन महिला अथवा देवी मंदिर में सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी, लाल चुनरी और अन्य श्रृंगार सामग्री का दान करना भी शुभ माना गया है. मान्यता है कि इससे मांगलिक दोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं.
योग प्रबल
पंडित कल्कि राम के मुताबिक, नवरात्रि के अंतिम दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विग्रह पर कलावा सात बार लपेटकर प्रतीकात्मक गठबंधन करते हुए शीघ्र विवाह की प्रार्थना करने की भी परंपरा है. धार्मिक विश्वास है कि इस उपाय से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी मिलने के योग प्रबल होते हैं.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें


