खाना खत्म होते ही थाली में धोते हैं हाथ? तो बदल दें यह आदत, जानिए क्यों
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भारतीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भोजन को मां अन्नपूर्णा का प्रसाद माना जाता है. इसलिए खाना खाने के बाद उसी थाली में हाथ धोना अन्न का अपमान माना जाता है. संतों का कहना है कि भोजन के प्रति सम्मान, थाली में झूठन न छोड़ना और भोजन से पहले व बाद में मां अन्नपूर्णा का स्मरण करना भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण संस्कारों में शामिल है.
फरीदाबाद: भारतीय संस्कृति में भोजन को सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं…बल्कि ईश्वर का प्रसाद माना गया है. हमारे घरों में बचपन से ही सिखाया जाता है कि अन्न का सम्मान करना चाहिए और एक भी दाना बेकार नहीं जाने देना चाहिए. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग खाना खाने के बाद उसी थाली में हाथ धो लेते हैं. यह आदत आम जरूर है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार इसे सही नहीं माना जाता. संतों का कहना है कि ऐसी छोटी-छोटी आदतें भी हमारे संस्कारों और अन्न के प्रति सम्मान को दिखाती हैं. इसलिए भोजन करने के साथ-साथ उससे जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए.
थाली में हाथ धोना अन्न का अपमान
Local18 से बातचीत में बल्लभगढ़ के उदासीन साधु आश्रम महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि आने वाले लोगों को भी मैं हमेशा यही सीख देते हैं कि खाना खाने के बाद कभी भी उसी थाली में हाथ नहीं धोना चाहिए. थाली में भोजन के कुछ कण रह जाते हैं और अन्न को मां अन्नपूर्णा का स्वरूप माना गया है. ऐसे में उसी थाली में हाथ धोना अन्न का अपमान माना जाता है.भोजन खत्म होने के बाद थाली को उठाकर सिंक या तय जगह पर रख दें और हाथ अलग से धोएं.
बिस्तर पर बैठकर कभी भोजन नहीं करना चाहिए
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि भोजन करते समय टीवी, मोबाइल या किसी दूसरी चीज में ध्यान नहीं लगाना चाहिए. जितना हो सके जमीन पर बैठकर प्रेम और शांति से भोजन करना चाहिए. बिस्तर पर बैठकर कभी भोजन नहीं करना चाहिए. खाना आराम से अच्छी तरह चबाकर खाना चाहिए ताकि शरीर को भी पूरा लाभ मिले. थाली में उतना ही भोजन लें..जितना आसानी से खा सकें. खाने के बाद थाली में झूठन छोड़ना भी ठीक नहीं माना जाता. भोजन पूरा होने पर मां अन्नपूर्णा का धन्यवाद करना चाहिए और फिर थाली को सम्मान के साथ उठाना चाहिए.
रामायण में भी है प्रसंग
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि रामायण का एक प्रसंग भी इस बात की सीख देता है. जब हनुमान जी लंका पहुंचे तो उन्होंने एक जगह भोजन की थाली देखी, जिसमें कटोरी में झूठी दही बची हुई थी. इसे देखकर हनुमान जी समझ गए कि जिसने भोजन किया है, उसने अन्न का सम्मान नहीं किया. इसके बाद कुछ समय में रावण का अंत हो गया. पहले के समय में लोग दही या दूध पीने के बाद कटोरी में थोड़ा पानी डालकर उसे भी पी लेते थे, ताकि कुछ भी व्यर्थ न जाए. इसे गौ रस कहा जाता था.
भोजन शुरू करने से पहले मां अन्नपूर्णा को हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि किसान दिन-रात मेहनत करके खेतों में अन्न उगाता है. उसकी मेहनत के बाद ही भोजन हमारी थाली तक पहुंचता है. इसलिए अन्न का हर दाना सम्मान के योग्य है. भोजन शुरू करने से पहले मां अन्नपूर्णा को हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए और भोजन खत्म होने के बाद भी उनका धन्यवाद करना चाहिए. थाली को सम्मान के साथ उठाकर साफ करना चाहिए…लेकिन उसी थाली में हाथ नहीं धोने चाहिए. छोटी-छोटी अच्छी आदतें ही हमारे संस्कारों की पहचान होती हैं और अन्न का सम्मान करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें


