कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी आज, सुबह से ही मुहूर्त, जानें पूजा विधि, मंत्र, चांद का समय

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी आज, सुबह से ही मुहूर्त, जानें पूजा विधि, मंत्र, चांद का समय

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कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी आज, सुबह से ही बना मुहूर्त, जानें पूजा विधि, मंत्र

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Sankashti Chaturthi July 2026 Muhurat: कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी आज है. आज के दिन सुबह से ही गणेश पूजा का मुहूर्त है और सर्वार्थ ​सिद्धि् योग भी बना है. इस व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देना जरूरी है, नहीं तो आपका व्रत पूर्ण नहीं होगा. आइए जानते हैं कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत और पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र.

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कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत और पूजा विधि.

Sankashti Chaturthi July 2026 Muhurat: आज सर्वार्थ ​सिद्धि् योग में कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी है. जो लोग आज व्रत हैं, वे शुभ मुहूर्त में विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा करें और रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें. आज सुबह से ही संकष्टी चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त बना है. इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं. गणेश जी के आशीर्वाद से शुभता बढ़ती है और कार्य सफल सिद्ध होते हैं.

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026 मुहूर्त

आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी तिथि का प्रारंभ: 3 जुलाई, 11:20 एएम से
आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी तिथि का समापन: 4 जुलाई, 12:39 पीएम पर
चतुर्थी पूजा का मुहूर्त: आज सुबह 05:28 ए एम से 10:41 ए एम तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह में 05:28 ए एम से 11:46 ए एम तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 07:12 बजे से 08:56 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 08:56 बजे से सुबह 10:41 बजे तक

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी पर अर्घ्य का समय

संकष्टी चतुर्थी का व्रत बिना चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य के पूर्ण नहीं होता है. आज चन्द्रोदय रात 09:53 पी एम पर होगा. ऐसे में आप रात 09:53 बजे से चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं.

गणेश पूजा मंत्र

  • ॐ गं गणपतये नमः
  • वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
  • गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बूफलचारुभक्षणम्।
    उमासुतं शोकविनाशकारकं, नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्॥

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत और पूजा विधि

  1. सुबह में स्नान करने के बाद व्रत और गणेश पूजा का संकल्प करें. उसके बाद शुभ मुहूर्त में लकड़ी की चौकी पर गणेश जी की स्थापना करें.
  2. गणेश जी का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें. उनको पीले और लाल वस्त्र चढ़ाएं. लाल और पीले फूल, अक्षत्, धूप, दीप, नैवेद्य, पान का पत्ता, सुपरी, सिंदूर, फल आदि गणेश जी को अर्पित करें. इस दौरान गणप​ति मंत्र का उच्चारण करते रहें.
  3. हरी दूर्वा गणेश जी के मस्तक पर चढ़ाएं. उनको मोदक, लड्डू, खीर-पूड़ी, नारियल आदि का भोग लगाएं. फिर गणेश चालीसा का पाठ करें और कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा सुनें.
  4. घी या तेल के दीपक या फिर कपूर से गणेश जी की आरती करें. पूजा के अंत में भूलवश हुई गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना करके मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद लें.
  5. दिनभर फलाहार पर रहें. रात के समय में चंद्रोदय होने पर कच्चे दूध, पानी, सफेद फूल और अक्षत् से चंद्रमा को अर्घ्य दें. उस समय चंद्र अर्घ्य मंत्र पढ़ें. क्षीरोदार्णवसंभूत अत्रिगोत्रसमुद्भव। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं रोहिण्या सहितो शशिन॥
  6. चंद्रमा अर्घ्य देने के बाद पारण करके व्रत को पूरा कर सकते हैं. या आपके यहां अगले दिन सूर्योदय बाद पारण होता है तो उस विधि से कल पारण करें.

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कार्तिकेय तिवारीDeputy News Editor

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें

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