शादी में हो रही देरी, हर बार बिगड़ जाती है बनी बनाई बात? जन्मतिथि से जानें कब बजेगी शहनाई
Marriage Prediction: हर किसी के मन में कभी न कभी यह सवाल जरूर आता है कि आखिर शादी कब होगी? कई लोग कुंडली दिखाते हैं, तो कुछ अंक ज्योतिष का सहारा लेते हैं. ज्योतिष शास्त्र में जन्मतिथि केवल आपकी उम्र बताने का माध्यम नहीं मानी जाती, बल्कि यह आपके जीवन के कई अहम पड़ावों का संकेत भी देती है. माना जाता है कि जन्म की तारीख, मूलांक और भाग्यांक के जरिए विवाह के समय का भी अनुमान लगाया जा सकता है.
हालांकि यह कोई अंतिम भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि अंक ज्योतिष पर आधारित एक संभावित गणना है. यदि सही तरीके से इस विधि को अपनाया जाए तो यह इस बात का संकेत दे सकती है कि किस वर्ष विवाह के योग मजबूत बन सकते हैं. आइए जानते हैं इस आसान ज्योतिषीय तरीके के बारे में.
अंक ज्योतिष में क्यों महत्वपूर्ण होती है जन्मतिथि?
अंक ज्योतिष के अनुसार हर अंक किसी न किसी ग्रह की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है. जन्म की तारीख से निकला मूलांक व्यक्ति के स्वभाव, सोच और जीवन की दिशा को दर्शाता है, जबकि भाग्यांक जीवन में मिलने वाले अवसरों और महत्वपूर्ण घटनाओं का संकेत देता है. विवाह भी इन्हीं प्रमुख घटनाओं में शामिल माना जाता है. ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि जब किसी विशेष वर्ष की अंक ऊर्जा व्यक्ति के मूलांक और विवाह योग से मेल खाती है, तब शादी की संभावनाएं अधिक मजबूत हो सकती हैं.
कैसे निकालें अपना मूलांक?
सबसे पहले अपनी जन्मतिथि का केवल दिन लें.
अगर किसी व्यक्ति की जन्मतिथि 12 सितंबर 1994 है, तो उसका दिन 12 होगा.
अब 1+2 = 3
यानी इस उदाहरण में व्यक्ति का मूलांक 3 माना जाएगा.
अगर आपकी जन्मतिथि पहले से एक अंक की है, जैसे 5 या 8, तो वही आपका मूलांक होगा.
भाग्यांक निकालने की आसान विधि
भाग्यांक निकालने के लिए पूरी जन्मतिथि के सभी अंकों को जोड़ना होता है.
उदाहरण के लिए 12-09-1994
1+2+0+9+1+9+9+4 = 35
अब 3+5 = 8
इस तरह इस जन्मतिथि का भाग्यांक 8 होगा.
हालांकि विवाह वर्ष की इस विशेष गणना में मूलांक का उपयोग अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है.
विवाह वर्ष जानने की ज्योतिषीय गणना
अंक ज्योतिष में एक आसान तरीका यह भी बताया जाता है कि पहले अपने मूलांक में जन्म का महीना जोड़ें.
यदि मूलांक 3 है और जन्म सितंबर यानी 9वें महीने में हुआ है, तो
3 + 9 = 12
अब 1+2 = 3
यह अंक आगे की गणना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
अब जिस वर्ष के बारे में जानना चाहते हैं, उसके सभी अंकों को इस प्राप्त अंक के साथ जोड़ें.
मान लीजिए आप वर्ष 2028 की जांच करना चाहते हैं.
2+0+2+8+3 = 15
अब 1+5 = 6
अब प्राप्त अंक 6 को विवाह मूलांक तालिका में देखा जाता है. यदि यह अंक आपके मूलांक के अनुकूल माना गया है, तो उस वर्ष विवाह के योग बनने की संभावना बढ़ सकती है.
कब मजबूत माने जाते हैं विवाह के योग?
अंक ज्योतिष के जानकारों के अनुसार हर मूलांक के लिए कुछ विशेष अंक शुभ माने जाते हैं. जब किसी वर्ष की अंतिम गणना उन्हीं अंकों पर पहुंचती है, तब उस साल रिश्ते तय होने, सगाई होने या विवाह संपन्न होने की संभावना अधिक मानी जाती है. हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि उसी वर्ष विवाह निश्चित रूप से होगा. ग्रहों की दशा, कुंडली के सप्तम भाव, विवाह कारक ग्रह और व्यक्ति के कर्म भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी व्यक्ति का मूलांक 3 है.
यदि वर्ष की गणना करने पर अंतिम अंक 1 आता है और विवाह तालिका में मूलांक 3 के लिए 1 शुभ अंक नहीं माना गया है, तो उस वर्ष विवाह की संभावना कमजोर मानी जाएगी. लेकिन यदि किसी दूसरे वर्ष गणना का अंतिम अंक 9 आता है और वह मूलांक 3 के लिए अनुकूल अंक है, तो उस साल विवाह के योग अधिक प्रबल माने जा सकते हैं. इसी वजह से कई लोग अलग-अलग वर्षों की गणना करके संभावित विवाह वर्ष का अनुमान लगाते हैं.
सिर्फ अंक नहीं, पूरी कुंडली भी जरूरी
ज्योतिष विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल अंक ज्योतिष के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा. यदि विवाह में लगातार देरी हो रही है या बार-बार रिश्तों में बाधा आ रही है, तो जन्म कुंडली, ग्रहों की दशा, गोचर और सप्तम भाव का विश्लेषण भी जरूरी होता है. अंक ज्योतिष इस दिशा में केवल एक संकेत देता है, जबकि अंतिम निर्णय संपूर्ण ज्योतिषीय अध्ययन के बाद ही लिया जाना चाहिए.
यदि आप भी यह जानना चाहते हैं कि किस वर्ष विवाह के योग मजबूत हो सकते हैं, तो जन्मतिथि से मूलांक और संबंधित वर्ष की अंक गणना करके एक संभावित संकेत प्राप्त कर सकते हैं. हालांकि इसे अंतिम भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए. बेहतर परिणाम के लिए अनुभवी ज्योतिषी से कुंडली का विस्तृत विश्लेषण कराना अधिक उचित रहेगा.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


