आखिर क्यों पैदा होने के 6 दिन बाद ही श्रीकृष्ण के बेटे को निगल गई थी मछली? जानें द्वारका क
आखिर क्यों पैदा होने के 6 दिन बाद ही श्रीकृष्ण के बेटे को निगल गई थी मछली?
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Krishna Son Pradyumna Story: भगवान कृष्ण से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियों में से, उनके पुत्र प्रद्युम्न की कहानी जितनी रहस्यमय शायद ही कोई हो. जन्म के कुछ ही दिनों बाद उनका अपहरण कर समुद्र में फेंक दिया गया, लेकिन ईश्वर की दिव्य योजना के आगे दैत्य की सारी चालें विफल हो गईं. यह कथा केवल एक चमत्कार नहीं, बल्कि इस सत्य का प्रतीक भी है कि जिसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं, उसका कोई अहित नहीं कर सकता.
Krishna Son Pradyumna Story: भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी अनेक लीलाएं और कथाएं आज भी श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित करती हैं. इन्हीं में से एक है उनके सबसे बड़े पुत्र प्रद्युम्न की अद्भुत कथा. द्वारका के राजपरिवार में जन्मे, युवा राजकुमार जन्म के कुछ ही दिनों बाद गायब हो गए. पूरे राज्य ने उनकी खोज की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला. अधिकांश लोगों का मानना था कि बच्चे की मृत्यु हो गई है. लेकिन द्वारका से बहुत दूर, एक शक्तिशाली राक्षस के महल की दीवारों के पीछे, एक रहस्य पनप रहा था. एक भविष्यवाणी, एक अपहरण और एक विशाल मछली के पेट में हुआ एक चमत्कार, यह सब एक दिव्य योजना का हिस्सा थे जो एक दिन लापता राजकुमार की असली पहचान उजागर करेगी.
भविष्यवाणी से भयभीत हो गया था शंबरासुर
श्रीमद्भागवत महापुराण और अन्य पुराणों के अनुसार, द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का प्रद्युम्न नाम का एक पुत्र का जन्म हुआ था. प्रद्युम्न के जन्म से पहले एक भविष्यवाणी हुई थी कि श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र के हाथों ही शंबरासुर नामक शक्तिशाली दैत्य का अंत होगा. जब शंबरासुर को इस भविष्यवाणी का पता चला तो वह भयभीत हो गया. उसने सोचा कि अगर बालक को जन्म लेते ही समाप्त कर दिया जाए, तो भविष्यवाणी कभी पूरी नहीं होगी.
जन्म के छह दिन बाद कर लिया अपहरण
प्रद्युम्न के जन्म के छठे दिन शंबरासुर ने मायावी रूप धारण कर द्वारका में प्रवेश किया. उसने शिशु का अपहरण कर लिया और एक पल भी बर्बाद किए बिना, वह बच्चे को दूर ले गया और उसे समुद्र में फेंक दिया. द्वारका में जब बालक नहीं मिला, तो पूरे राजमहल में शोक छा गया. भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी सहित सभी ने उसकी खोज करवाई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. सभी ने मान लिया कि युवा राजकुमार समुद्र की लहरों के नीचे डूब गया होगा, इस बात से अनजान कि भाग्य ने पहले ही उसकी रक्षा करना शुरू कर दिया था.
विशाल मछली बनी भगवान की योजना का माध्यम
समुद्र में गिरते ही एक विशाल मछली ने प्रद्युम्न को निगल लिया. आश्चर्य की बात यह थी कि बालक पूरी तरह सुरक्षित रहा. कुछ समय बाद मछुआरों ने उसी मछली को पकड़ लिया और संयोगवश उसे शंबरासुर के महल की रसोई में भेज दिया. जब रसोइयों ने मछली का पेट काटा, तो उसके भीतर से एक जीवित शिशु निकला. महल में मौजूद मायावती नाम की महिला ने उस बालक को अपने संरक्षण में ले लिया. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मायावती वास्तव में रति देवी थीं, जो अपने पति कामदेव के पुनर्जन्म की प्रतीक्षा कर रही थीं. प्रद्युम्न को कामदेव का ही पुनर्जन्म माना जाता है, क्योंकि भगवान शिव के क्रोध से भस्म होने के बाद कामदेव ने श्रीकृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लिया था.
शत्रु के महल में ही हुआ पालन-पोषण
शंबरासुर को इस बात का बिल्कुल आभास नहीं था कि जिस बालक को वह मारना चाहता था, वही उसके महल में पल-बढ़ रहा है. समय बीतने के साथ प्रद्युम्न एक तेजस्वी, पराक्रमी और दिव्य शक्तियों से संपन्न युवक बने. बाद में देवर्षि नारद ने उन्हें उनके वास्तविक जन्म और माता-पिता के बारे में बताया. इसके बाद मायावती ने भी उन्हें महामाया विद्या का ज्ञान दिया, जिससे वे शंबरासुर की मायावी शक्तियों का सामना कर सकें.
अंततः पूरी हुई भविष्यवाणी
प्रद्युम्न द्वारा अपनी वास्तविक पहचान का पता चलने पर, सब कुछ बदल गया. वह भविष्यवाणी जो वर्षों से शंबरा को सता रही थी, अंततः पूरी होने के लिए तैयार थी. सत्य का पता चलने के बाद प्रद्युम्न ने शंबरासुर को युद्ध की चुनौती दी. भीषण युद्ध में उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति और मायावती द्वारा सिखाई गई विद्या के बल पर शंबरासुर का वध कर दिया. इस प्रकार वह भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई, जिससे बचने के लिए दैत्य ने इतना बड़ा षड्यंत्र रचा था. इसके बाद प्रद्युम्न मायावती के साथ द्वारका लौटे. प्रारंभ में किसी ने उन्हें पहचाना नहीं, लेकिन जब देवर्षि नारद ने पूरा रहस्य बताया, तो माता रुक्मिणी और भगवान श्रीकृष्ण अपने खोए हुए पुत्र को पाकर भावविभोर हो उठे. पूरे द्वारका में उत्सव मनाया गया.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


