Nirjala Ekadashi पर इस तरह से पीएंगे पानी तो नहीं टूटेगा व्रत, बस चांदी या पीतल की थाली रख
Nirjala Ekadashi पर इस तरह से पीएंगे पानी तो नहीं टूटेगा व्रत, इसका रखें ध्यान
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Nirjala Ekadashi Water Drinking Rule: निर्जला एकादशी पर पूरे दिन बिना पानी के व्रत रखना बेहद कठिन माना जाता है, लेकिन शास्त्रों में कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जिनसे आस्था भी बनी रहती है और स्वास्थ्य का ध्यान भी रखा जा सकता है. मान्यता है कि अगर कुछ खास नियमों के साथ सीमित मात्रा में पानी लिया जाए तो व्रत भंग नहीं होता. बस चांदी या पीतल की थाली पास रखें और तय विधि से जल ग्रहण करें.
Nirjala Ekadashi 2026 Water Drinking Rule: 25 जून दिन गुरुवार को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा, यह व्रत हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है. वैसे तो पूरे साल में 24 एकादशी आती हैं लेकिन ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है. मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत करने से 24 एकादशियों का फल तो मिलता ही है इसलिए इसे बड़ी एकादशी भी कहते हैं. हालांकि बहुत से लोगों के लिए गर्मी के मौसम में बिना पानी के व्रत रखना असंभव हो जाता है इसलिए कुछ लोगों को व्रत से छुट मिली हुई है. अगर आप भी बिना पानी के नहीं रह पा रहे हैं तो इस उपाय की मदद से पानी पी सकते हैं, ऐसा करने से आपका व्रत नहीं टूटेगा.
निर्जला एकादशी का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में भीमसेन भोजन और जल के बिना व्रत नहीं रख पाते थे. तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें निर्जला एकादशी का व्रत करने की सलाह दी थी. मान्यता है कि इस एक दिन का कठोर व्रत करने से अन्य सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है. इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है. इस व्रत के प्रभाव से ही भीम को दस हजार हाथियों का बल प्राप्त हुआ था और महाभारत युद्ध में दुर्योधन को हराया था. निर्जला एकादशी के दिन श्रद्धालु सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि के पारण तक अन्न और जल का त्याग करते हैं. व्रत के दौरान भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसीजी की पूजा की जाती है. भक्त विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और भगवान के मंत्रों का जाप कर पुण्य अर्जित करते हैं.
निर्जला एकादशी व्रत 2026
एकादशी तिथि की शुरुआत, 24 जून, शाम 6 बजकर 12 मिनट से
एकादशी तिथि का समापन, 25 जून, रात 8 बजकर 09 मिनट तक
उदिया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून दिन गुरुवार को किया जाएगा.
पारण का समय – 26 जून, सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट तक
इस तरह पी सकते हैं पानी
निर्जला एकादशी के दिन अगर आप पानी बिना नहीं रह पा रहे हैं तो ॐ नमो नारायणाय मंत्र का 21 बार जप करें. इसके बाद चांदी या पीतल की साफ थाली में गंगाजल मिला हुआ पानी डालें. इसके बाद घुटने व हाथों को जमीन पर रखकर पशुवत जल पी सकते हैं. ऐसा करने से निर्जला एकादशी का व्रत भंग नहीं होता है. दूसरे दिन द्वादशी तिथि है यानी 26 जून को आप 8 हजकर 13 मिनट तक कभी भी पारण कर सकते हैं.
इन लोगों को मिली है इजाजत
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से पापों का नाश होता है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. साथ ही गर्मी के मौसम में प्यासे लोगों को जल, छाता, पंखा, फल और वस्त्र का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं में बताया गया है कि बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बीमार व्यक्ति अपनी स्थिति के अनुसार व्रत के नियमों में आवश्यक बदलाव कर सकते हैं.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


